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वसुंधरा सरकार के ‘गैरकानूनी’ कानून पर मोदी की चुप्पी और कांग्रेस के अनैतिक विरोध की वजह

शाही परिवारों की रियासत और लोकतंत्र की सियासत का एक फर्क ये होता है कि रियासतों में राजा का ‘हुक्म’ हीं सबकुछ होता है और लोकतंत्र में जनता ही राजा होती है और वहां चुने हुए जनसेवक फैसले लेते हैं… फैसले, जनता के लिए। राजस्थान में शाही परिवार की बहू और मौजूदा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया यही फर्क भूल गईं। और भूलीं भी कुछ यूं कि एक ऐसा बिल लाने की भूल कर गईं जिसको लेकर राजस्थान की सियासत में घमासान मचा है।
बिल पहले तो किसी भी जज, मजिस्ट्रेट या सरकारी कर्मचारी के जांच के दायरे में आने से बचाता है क्योंकि बिल के मुताबिक जांच के लिए सरकार की इजाज़त लेना ज़रुरी होगा। दूसरे ये कि बिल मीडिया की स्वतंत्रता पर भी हमला करता है क्योंकि मीडिया को भी भ्रष्टाचार और भ्रष्ट को सामने लाने की इजाज़त नहीं देता। इतना ही नहीं, नियम न मानने पर मीडियाकर्मी को जुर्माने और 2 साल की सज़ा का भी प्रावधान है।

हंगामा पुरजोर है लेकिन इस बिल को लेकर कुछ बातें समझना बहुत ज़रुरी है।

1.बिल को लाने का तर्क ही निराधार Continue reading “वसुंधरा सरकार के ‘गैरकानूनी’ कानून पर मोदी की चुप्पी और कांग्रेस के अनैतिक विरोध की वजह”

‘बीमार’ रवीश कुमार के नाम खुला खत

प्रिय रवीश जी,

बहुत दिनों से आपको चिट्ठी लिखने की सोच रहा था लेकिन हर बार कुछ न कुछ सोचकर रुक जाता था। सबसे बड़ी वजह तो ये थी कि मेरा इन ‘खुले खत’ में विश्वास ही नहीं रहा कभी। खासकर तब से जब सोशल मीडिया पर आपकी लिखी वो चिठ्ठी पढ़ ली थी जिसमें आपने अपने स्वर्गीय पिता को अपने शोहरत हासिल करने के किस्से बताए थे औऱ बताया था कि कैसे एयरपोर्ट से निकलते लोग आपको घेरकर फोटो खिंचवाने लग जाते हैं। बतौर युवा, जिसने 9 वर्ष की उम्र में अपने पिता को खो दिया था, मैं कभी उस खत का मकसद समझ ही नहीं पाया। मैं समझ हीं नहीं पाया कि वो चिट्ठी किसके लिए थी, उस पिता के लिए जो शायद ऊपर से आपको देख भी रहा था और आपकी तरक्की में अपने आशीर्वाद का योगदान भी दे रहा था या फिर उन लोगों के लिए जिन्हें ये बताने की कोशिश थी कि आई एम अ सिलेब्रिटी। क्योंकि मेरे लिए तो मेरे औऱ मेरे स्वर्गीय पिता का रिश्ता इतना निजी है कि मैं हमारी ख्याली बातचीत को सोशल मीडिया पर रखने का साहस कभी जुटा नहीं सकता।
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