‘बीमार’ रवीश कुमार के नाम खुला खत

Share Now
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

प्रिय रवीश जी,

बहुत दिनों से आपको चिट्ठी लिखने की सोच रहा था लेकिन हर बार कुछ न कुछ सोचकर रुक जाता था। सबसे बड़ी वजह तो ये थी कि मेरा इन ‘खुले खत’ में विश्वास ही नहीं रहा कभी। खासकर तब से जब सोशल मीडिया पर आपकी लिखी वो चिठ्ठी पढ़ ली थी जिसमें आपने अपने स्वर्गीय पिता को अपने शोहरत हासिल करने के किस्से बताए थे औऱ बताया था कि कैसे एयरपोर्ट से निकलते लोग आपको घेरकर फोटो खिंचवाने लग जाते हैं। बतौर युवा, जिसने 9 वर्ष की उम्र में अपने पिता को खो दिया था, मैं कभी उस खत का मकसद समझ ही नहीं पाया। मैं समझ हीं नहीं पाया कि वो चिट्ठी किसके लिए थी, उस पिता के लिए जो शायद ऊपर से आपको देख भी रहा था और आपकी तरक्की में अपने आशीर्वाद का योगदान भी दे रहा था या फिर उन लोगों के लिए जिन्हें ये बताने की कोशिश थी कि आई एम अ सिलेब्रिटी। क्योंकि मेरे लिए तो मेरे औऱ मेरे स्वर्गीय पिता का रिश्ता इतना निजी है कि मैं हमारी ख्याली बातचीत को सोशल मीडिया पर रखने का साहस कभी जुटा नहीं सकता।

खैर, वजह आप बेहतर जानते होंगे लेकिन उस दिन से ऐसा कुछ हुआ कि मैंने चिठ्ठी न लिखने का फैसला कर लिया। लेकिन कल आपकी वो चिठ्ठी पढ़ी जो आपने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखी थी। आपके बीते कुछ दिनों के बयानों औऱ इस चिठ्ठी से मेरे मन में कुछ सवाल आए और साथ ही बतौर पूर्व सहकर्मी, मुझे लगा कि मुझे आपको बताना चाहिए कि आप ‘बीमार’ हैं औऱ आपको इलाज की ज़रुरत है। कृपा कर इसे अन्यथा मत लीजिएगा क्योंकि मुझे आपकी चिंता है इसलिए तहे दिल से ये खत लिख रहा हूं।

पहली बीमारी- बिना वजह अनदेखे डर से भयग्रस्त रहना

आपकी चिठ्ठी पढ़कर जो पहला सवाल मन में आया था वो ये कि आपको बेरोज़गार होकर सड़क पर आ जाने की चिंता सता भी कैसे सकती है? आपकी तन्खवाह लाखों में हैं। अगर गलत नहीं हूं तो करीब 8 लाख रुपए प्रति महीने के आसपास। यानि साल का करीब करीब करीब 1 करोड़ रुपया कमा लेते हैं आप। सुना है आपकी पत्नी भी नौकरी करती हैं। यानि आपके घर बैठने की नौबत भी आई तो वो घर चला ही लेंगीं। और दोनों घर बैठे तो भी साल के करोड़ रुपए की कमाई से आपने इतना तो बचा ही लिया होगा कि आप सड़क पर न आ जाएं। इतने पैसे की सेविंग को फिक्स भी कर दिया होगा तो भी इतना पैसा हर महीने आ जाएगा जितना मीडिया में कईयों की सैलरी नहीं होती। पैसा घर चलाने भर नहीं बल्कि सामान्य से ऊपर की श्रेणी का जीवन जीने के लिए आएगा। अब अगर आपकी जीवन शैली किसी अरबपति जैसी हो गई है कि लाख-दो लाख रुपए प्रति महीने की कमाई से काम नहीं चलेगा तो कह नहीं सकता। लेकिन घबराने की तो कतई ज़रुरत नहीं है। आप खुद भी चाहें तो भी आप और आपके बच्चे सड़क पर नहीं आ सकते और कुछ नहीं तो मेरे जैसे कई पूर्व सहकर्मी हैं हीं आपकी मदद के लिए।

हिम्मत लीजिए उनसे और सोचिए ज़रा अपने ही दफ्तर के उन चपरासियों और कर्मचारियों के बारे में जिनकी तनख्वाह 20-30 हज़ार रुपए महीने की थी और जिन्हें संस्थान ने हाल ही में नौकरी से निकाल दिया। आप करोड़ रुपए कमा कर सड़क पर आ जाने के ख़ौफ से घिर रहे हैं, उनकी और उनके बच्चों की हालत तो सच में सड़क पर आ जाने की हो गई होगी। और आप उनके लिए संस्थान से लड़े तक नहीं? आपको तो उनका डर सबसे पहले समझ लेना चाहिए था लेकिन आप आजकल पीएम को चुनौती देने में इतना व्यस्त रहते हैं कि अपने संस्थान के ही फैसले को चुनौती नहीं दे पाए? खैर, कोई नहीं.. टीवी पर गरीबों का मसीहा दिखने औऱ सच में होने में फर्क होता ही है। पीएम को चुनौती देकर आप हीरो दिखते हैं, मैनेजमेंट को चुनौती देकर नौकरी जाने का खतरा रहता है और कोई ये खतरा क्यों ले। और नौकरी जाने का डर कितना भरा है आपके मन में ये तो आपके साथ काम करनेवाले कई लोग अच्छे से जानते हैं। कुछ लोग तो वो किस्सा भी बताते हैं कि आउटपुट के एक साथी को नोटिस मिला औऱ वो पार्किंग लॉट में आपसे मिलकर मदद की गुहार लगाने आया तो आपने गाड़ी की खिड़की का शीशा तक नीचे नहीं किया और अंदर से ही हाथ जोड़कर निकल लिए। जबकि आप भी जानते थे कि उसका दोष मामूली सा था। आप उसके साथ खड़े हो जाते तो उसकी नौकरी बच जाती। लेकिन आपने उसके परिवार के सड़क पर आ जाने का वो दर्द महसूस नहीं किया जो आजकल आप महसूस कर रहे हैं अपने बच्चों के लिए।

खैर, जाने दीजिए। आपके डर को बेवजह इसलिए भी बता रहा हूं कि आप खुद सोचिए कि जिस नरेन्द्र मोदी को आप महाशक्तिशाली बताते हैं वो 2002 के बाद से 15 साल इंतज़ार करते रहेंगे आपकी नौकरी खाने के लिए? इतना ही नहीं, पिछले तीन साल से तर्क और कुतर्क के साथ आपने सरकार पर सवाल उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी तब भी बीजेपी का ग्राफ़ ऊपर से भी ऊपर ही गया, वो चुनाव पर चुनाव जीतते गए तो वो आपकी नौकरी क्यों खाना चाहेंगे? आपके तार्किक और गैर तार्किक विरोध से या तो उनको फर्क नहीं पड़ रहा या फिर उनका फायदा ही हो रहा है, ऐसे में आपकी नौकरी खाने में उनकी क्या दिलचस्पी होगी? ये डर आपके अंदर कोई भर रहा है, जानबूझकर औऱ वो आपके आसपास ही रहता है। कौन है खुद सोचिएगा।

बस कहना मैं ये चाह रहा हू कि आप अपने मन से सड़क पर आने का खौफ निकाल दीजिए क्योंकि ये बेवजह का डर है। नौकरी गई भी तो इतने काबिल हैं आप, कोई न कोई और नौकरी मिल ही जाएगी आपको भी। कुछ नहीं तो बच्चों को पढ़ाकर घर चल ही जाएगा। आपकी लेखनी का कायल तो मैं हमेशा से रहा हूं, आपको पता ही है.. कुछ नहीं तो हिन्दी फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखकर भी आपका घऱ चल जाएगा। पीएम के नाम चिठ्ठी में बच्चों के सड़क पर आ जाने का जो इमोशन आपने डाला था वैसा ही इमोशन और एक दिन शो में जैसे आप पीएम को ललकार रहे थे, वैसा ही अग्रेशन.. दोनों को मिलाकर स्क्रिप्ट लिख देंगे तो पक्का फिल्म चलेगी। मेरी गारंटी है।

दूसरी बीमारी- स्पलिट पर्सनालिटी या दोहरे व्यक्तित्व का शिकार हो जाना

इस बीमारी में इंसान खुद ही समझ नहीं पाता कि उसके अंदर दो दो इंसान पल रहे होते हैं। आप खुद लिखते हैं अपने बारे में औऱ बताते भी हैं कि आप बिना सवाल पूछे नहीं रह पाते, सच के लिए लड़ने से और सवाल उठाने से खुद को रोक नहीं पाते लेकिन आपके अंदर ही एक दूसरा रवीश कुमार रहता है जो इतना डर सहमा होता है कि नौकरी के मोह में अपने खुद के संस्थान या बॉस से कोई सवाल ही नहीं पूछता। आपको याद है न कि कैसे एक दिन अचानक एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर ने फरमान सुना दिया था कि देश के लिए जान देने वाले और शहीद होनेवाले सैनिक को हम ‘शहीद’ नहीं कहेंगे और न हीं लिखेंगे बल्कि उसे ‘मर गया’ बताएंगे। ऊपर से लेकर नीचे तक हड़कंप मच गया था कि देश के लिए जान कुर्बान करनेवाले सैनिक के प्रति इतना असम्मान क्यों? लेकिन आप तब भी चुप रह गए थे। कुछ नही बोले, न कोई सवाल उठाया।

और वो किस्सा भी याद होगा आपको जब एक फेसबुक पोस्ट लिखने पर मुझे नौकरी तक से निकाल देने की धमकी दे दी गई थी। पोस्ट में मैंने सिर्फ इतना लिख दिया था कि हम देश की अदालत और उसके फैसले का सम्मान करते हैं तो फिर इस तथ्य का सम्मान क्यों नहीं करते कि देश की किसी भी अदालत ने नरेन्द्र मोदी को गुजरात दंगों का दोषी करार नहीं दिया है औऱ क्यों मीडिया की अदालत आज भी उन्हें दोषी करार देकर सज़ा देने पर आमादा है अपने अपने स्टूडियो में?

बोलने की आज़ादी के सबसे बड़े पैरोकार बनने वाले चैनल ने क्यों मेरी आज़ादी पर पाबंदी लगा दी औऱ आप चुप रह गए? आप मेरे साथ क्यों खड़े नहीं हुए? क्यों मेरी तरफ से मैनेजिंग एडिटर को खुली चिठ्ठी नहीं लिखी कि ये तो सीधा सीधा मेरे बोलने और विचारों की आजादी की हत्या है औऱ इसे रोका जाना चाहिए? ऐसे ही कितनी बार कितनों के साथ उनकी बोलने की आज़ादी का हनन हुआ पर आप किसी के लिए नहीं लड़े,क्यों? मैं सोचता रह गया था लेकिन अब पता चला कि दरअसल, दो दो रवीश हैं। एक वो रवीश, जो टीवी पर खुद को मसीहा पत्रकार दिखाता है औऱ दूसरा वो रवीश जो डर सहमा नौकरी बजाता है। एक रवीश जो प्रधानमंत्री को चैलेंज करता है औऱ दूसरा वो जो चुपचाप सिर झुकाकर संस्थान के मालिक/बॉस की हर बात सुन लेता है।

तीसरी बीमारी- खुद को हद से ज्यादा अहमियत देना और महानता के भ्रमजाल में फंस जाना

मुझे आज भी याद है कि कैसे आपने अहंकार के साथ न्यूज़ रुम में कहा था कि आप अमिताभ बच्चन के साथ एक शो करके आए हैं औऱ एडिटर को बोल दिया जाए कि जब शो एडिट हो तो बच्चन साहब से ज्यादा आपको दिखाए स्क्रीन पर क्योंकि लोग बच्चन साहब से ज्यादा आपको देखना चाहते हैं। मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ था लेकिन जो सामने था उसे कैसे नकारता। आपकी टीम के लोग भी आपसे दुखी रहते हैं क्योंकि आप अपने आगे किसी को कुछ समझते नहीं और सबको तुच्छ प्राणी सा एहसास कराते हैं। उस दिन आप गौरी लंकेश की हत्या पर हुए कार्यक्रम में बोलने गए तो वहां भी बोलने लग गए कि सब आपको कह रहे हैं कि आप ही बचे हैं बस, थोड़ा संभलकर रहिएगा। आप खुद को इतनी अहमियत क्यों देते हैं? आपके पहले भी पत्रकारिता थी, आपके बाद भी होगी, नरेन्द्र मोदी के पहले भी राजनीति थी औऱ उनके बाद भी होगी। आप क्यों इसे सिर्फ और सिर्फ रवीश Vs मोदी दिखाकर खुद का कद बढ़ाने की जद्दोजहद में वक्त गंवा रहे हैं। इसी बीमारी का नतीजा है कि आप हर बात में अपनी मार्केटिंग का मौका ढूंढने में लगे रहते हैं। आपके आसपास ही इतने सारे प्रतिभावान पत्रकार एनडीटीवी में ही हैं जो बिना खुद की मार्केटिंग किए शानदार काम कर रहे हैं। आप उनसे सीख भी सकते हैं और प्रेरणा भी ले सकते हैं। दिन रात खुद को एहमियत देना बंद कर दीजिएगा तो चीज़ें सामान्य लगने लगेंगीं।

मेरी मानिए, रवीश की रिपोर्ट वाले रवीश बन जाइए। आपका कोई कुछ नहीं बिगाड़नेवाला। मैं डॉक्टर तो नहीं लेकिन मुझे लगता है कि इन सारी बीमारियों का इलाज होना ज़रुर चाहिए। किसी डॉक्टर से मिलकर देखिए एक बार। आप जैसे प्रतिभावान पत्रकार की ज़रुरत है देश को। और कभी पत्रकारिता छोड़िएगा तो नेता बनने से पहले एक बार अभिनेता बनने पर विचार ज़रुर कीजिएगा, मुझे उसका कौशल भी दिखता है आपमें।

हो सके तो इस चिठ्ठी का जवाब भी मत दीजिएगा क्योंकि अभी आप बीमार हैं, आप इस चिठ्ठी को भी अपनी मार्केटिंग का जरीया बनाने लग जाइएगा बिना सोचे समझे। इसलिए इसका प्रिंट आउट तकीए के नीचे रखकर सो जाइएगा औऱ गाहे बगाहे पढ़ लीजिएगा।

आपके जल्द सकुशल होने की कामना के साथ

सुशांत सिन्हा

साथी पत्रकार

231 thoughts on “‘बीमार’ रवीश कुमार के नाम खुला खत

  1. Dear very true !! IN Past when you was in NDTV I surprised how you stay thier bcoz you was nationalist while NDTV management and its boss Pranov is like terririst through computer viz media

    1. I was expecting that someone will show mirror to “The Ravish Kumar” and will show his true colors to the world. For sure he is illusioned in Rajdeep Sardesai way. Thank you for “No nonsense, To The Point Lettet.”.

      1. I am big of ravish from last 6 to 7 year. I liked the way he was doing ravish ki report but suddenly after 2013 he is not in his own control.
        I appreciate your khula khat to ravishji. We just can hope that he will realize the Truth ethics of journalist.

    2. सर 🖕🙏👏👏👏आपको सलाम यह सच्चाई देश के सामने लाने के लिए आजकल सच कोई कोई ही बोलता है किसी के बारे मे सब सच्चाई बोलने से डरते हैं मीडिया वाले तो खासकर अपने संस्थान के किसी के बारे में तो बिलकुल भी खिलाफ नहीं जाते आपने सच्चाई बोलने की हिम्मत दिखाई उसके लिए जितनी तारीफ़ करे कम ही है सलयुट है आपकी सच्चाई को

      1. mein ziada to nahi likhna chahunga, lekin itnq zaroor kahoonga ki ravish kumar bika nhi bjp ke hathon, yahi galti ki usne, agar woh bhi bik jata aur bjp jo chahti wahi news dikhata to shayed aisa khula khat likhne ki zaroorat nhi padti,koi bhi ndtv channel ko kharid sakta hai lekin ravish kumar ko nhi,pm modi ne sarkar banwane ke liye media house ko 1100 crore rupees diye the jo MP ke ek news paper mein chhapa bhi tha, lekin woh paisa ndtv ravish kumar ne lene se mana kar diya tha, aur yahi jurnalist ki khubi honi chahiye ki woh sarkar ke galat kamo ko ujagar kare,wahi sachchi patrkarita hai,jurnalist ko hamesha oposition mein rahna chahiye tabhi us desh ka vikas mumkin hai, jo ravish ji kar rhe, varna zee news to openly bika hua channel hai,sara desh janta hai jab dekho woh bjp ka chat raha hota hai aur sare channel ka wahi hal hai kamo besh dusra chatne wala.dipak chaurasiya hai..anjana on kadhyap sumit awasthi, amish devgan sudhir chowdhari, rohit sardana, sare bike hue jurnalist hai

        1. आपके अनुसार रविश कुमार ही एकमात्र ऐसा स्तम्भ है पत्रकारिता की दुनिया में जो मोदी जी के हाथों में बिका नहीं। मेरा मानना है कि रविश कुमार को खरीदने की जो कीमत लगाई गई होगी वो कीमत रविश कुमार को कम या तुच्छ या उनके मन अनुसार नही होगी क्योंकि आजकल भारत के कुछ पत्रकारों ने एक फैसन अपना लिया है और इस फैसन में एक ही सबसे बड़ा मैटर यह है कि महान पत्रकार कहलाने के लिए मोदी जी के विरुद्ध मनगढंत झूठे आरोपों का पुलिंदा खोल खोल कर पब्लिक को गुमराह करना है। इस प्रक्रिया को अपनाने से बहुत से काल्पनिक फायदे भी हैं। 1. वीर कहलाने की मंशा पूरी होगी 2. विरोधियों द्वारा निर्भीकता का मेडल पहनाया जाएगा 3. कहीं मोदीजी फिसल गए , आज विरोध में जो बैठे हैं , उनकी सरकार आ जायेगी तब इनको इस मोदी विरोध के अभिमन्यु जी को मंत्री बना दिये जाने की कल्पना सार्थक परिणाम दे सकती है 4. विरोधी पार्टियां इनके मोदी विरोध की उल जलूल प्रपंचों से खुश होकर
          ईनको अभी से ही जितनी इनको इनके एम्प्लॉयर पे करते हैं , उसमें ज्यादा नही भी तो कम भी नही अपने समय के देश लूट की राशि से लाभान्वित करते ही होंगे, यह अलग बात है इनको विरोधी दल के नेताओं द्वारा 10 स्टार सुख सुविधाएन जो इन नेताओं की भोगने की आदत रही है ऐसी सुखसुविधाएं अभी से प्रदान की जाती ही होगी। ऐसे रविश जी से ज्यादा सच्चा पत्रकार तो न कोई हुवा है न होगा क्योंकि यही एक मात्र पत्रकार हैं जो मोदी जी के हाथों बीके नहीं। इनके अलावा जितने भी हैं एक राज दीप सरदेसाई जी को छोड़ के जो डकैत, चोर , रेपिस्ट खानदान याने श्री नरेन्द्र मोदी जी के गिरोह के हैं। देश को लूटने में मोदी जी को मदद कर रहें हैं। एक मात्र देश भक्त पार्टी कांग्रेस के विरुद्ध अफवाह फैला रहे हैं।

          1. This has become a trend to defame Govt. & Narendra Modi as some Journalists and opposition parties have made a nexus to try to reach a win win situation(earings and power remains intact) for them by hook or crook.

          2. Apke ke hisab se Zee media hi ek achha channel hoga. Aur apke priy Rohit Sardana ji best reporter. Jab wo anchoring karatey to Mano kagata hai koyi BJP ka prawaqta baitha Ho.

          3. रवीश कुमार का नाम रब्बीश कुमार होना चाहिए। मैं इनके पड़ोस मोतिहारी का ही हूँ ।ये निहायत आडंबरी आदमी है और भाई पर हो रही कार्रवाई से विचलित है ।जिष प्रकार इनके दो टके के टुच्चे कन्हैया और उमर खालिद को हीरो बनाने की कोशिश की इससे नफरत हो गई। बरखा दत्त ने कन्हैया का स्क्रिप्ट लिखा और रब्बीश ने लाइव कवरेज किया । जिस दिन इसके खिलाफ देशद्रोहियों को पोषित करने का पर्दाफाश सुशांत जी करेंगे उसी दिन दिल को तसल्ली मिलेगी। मुझे पूरा विश्वास है सुशांत जी की कलम की काबलियत पर पूरा यकींन है। भारत माता की जय!

        2. Yes, ravish Kumar already itne bik chuke the ki unke pass ab jagah nahi bachi this ki Kisi aur ke haanthon bik paate. Issi liye wo ek pakshiy reporting karne lage wo Sahi aur galat chhod Kar ndtv ke liye reporting karne lage.

        3. आप की बातों से सहमत हूँ ।ईमानदारी की बात यह है कि सुशान्त जी का नाम पहली बार पता चला है।मौजूदा माहौल में सत्ता के खिलाफ बोलना निश्चित रूप से खतरनाक है।साहित्यकारों ,एक्टीविस्ट ,सरकारी मुलाजिम(व्यापम , NHRM, वगैरह) सच है इस समय का ।
          सुशांत का पत्र तो ऐसा है जैसे रामराज चल ही रहा हो ।इससे वो मशहूर भी हुए और ईनाम जल्दी ही सरकार देगी ।एक बात और, रवीश ने किसी पत्रकार का नाम कभी लिया ही नहीं और सत्ता के विरुद्ध आवाज़ उठाना पत्रकार की ड्यूटी है ।सुशांत ने सत्ता की चापलूसी मे रवीश पर व्यक्तिगत हमले किए हैं जोकि शर्मनाक है । रवीश कोई पुलिस माफिया तो नहीं है कि सुशांत को कोई खतरा हो ।
          साहस हो तो बड़े बड़े मामलों को उठाएं ,न कि रवीश की बराबरी का सपना देखें ।इति ।

          1. क्या रवीश मोदीजी पर निजी हमलें नहीं कर रहा हैं। रवीश करें तो सही, रवीश से सवाल पूछो तो गलत हो जाता हैं। इस तरह के दोहरे मापदंड ही देश को डुबो रहे हैं।

        4. Sriman aap toh CBI ke director nikle… 1100 Cr. ka koi proof hai… Ya phir Sallu bhaiyya ne itne goli bhar diye ki aap confuse hain ki Khae kaha se aur #### kaha se..

        5. मोदी जी के जैसा इस देश को pm कभी नही मिलने वाला, ये रविश की क्या औकात है।

        6. Woh sab toh theek hai ~ lekin lagé haath yeh bhi bataa deejiyé ki yeh ekmaatra “last & final” true patrkaar Ravish mian apné badé bhaiyya jo bihar mein Congressi neta hain aur saath hi saath badé netaaon ko ladkiyon ki dalaali mein bhi lipt rehté hain – jinké khilaaf abhi haal mein ek æisi hi piditaa ladki né rape aur blackmail ka case darj karayaa tha : jis par gair zamaanati warrant issue ho jaané par woh faraar ho gayé thé aur bechari ladki ko uské pariwaar ké saath daraané dhamkaané mein koi kasar nahi chhod rahé thé – yaad aya? Toh unhi badé bhai lé liyé Congress sé ticket ki pæiravi karné walé Ravish mian, duniya ké aakhri sacché patrakaar (jjské baad khuda né sachhé patrkaar banaané ka silsila band kar diya hai), uss bechari ladki ko lékar programme kab karengé? Kya kabhi apné sagey bhai ki kartoot ké khilaaf screen kali karengé aur agar haan toh kab? Jab bhrata shri ké khilaaf gareeb ki beti né himmat karké FIR darz karaya tab toh nahi kiya! Na tab kiya jab bechari ko khud jaan sé maarné aur uské pariwar walon ki æisi ki tæisi kar dené ki dhamkiyan badé badé néta aur bahubalii aayé din dé rahé thë! Tab bhi nahi kiya jab police dabaav mein aakar case darz karné mein anakaani dikha rahi thi! Aur tab bhi nahi kiya jab badé bhaiyya rape karké faraari kaat rahé thé!!! Toh itnaa hi bataa dein, kya jab (agar) sajaa ho jaayegi tab karengé?

          [Nahi toh iska matlab yehi hoga ki saari imaandari, saari sacchai, aur saari bahaduri bas jabaani jamaa kharch hai ~ agar rohit sardana BJP ke pravaktaa hain toh yeh toh uns| kaafi zyada puraané Comgressi pravaktaa hain! Aur iskaa matlab bas yeh hua ki saari qavaayad wahi purani, ki ek party ké bhakt A ko hero bataané mein aur B ko villlain bataané mein bhidé hain wanhi duusri party ké chamché B ko hero aur A ko villain bataané ki bewkoofi, farziwaadé aur khuraafat mein vyast hain aur apka akhir sachha na bikau patrkaar asal mein kisi ké A aur kisi ké B së zyada kuch nahi aur aap svayam Bhakt aur chamché ké beech mein se ek hain – aur dono milkar poori behayaayi aur badniyati ké saath lambi lambi haank rahé hain]

        7. Shayad Aap kahna chahte hai ki ravish Ko BJP nahi khareed payi par baki sari partio ne mil kar Anti Modi news karne ke lie hire kar Lia. BARKHA DUTT, RAJDEEP SARDESAI, RAVEESH KUMAR ye sabhi baki partiyo ke chamche hai . Shayad yahi matlab hai apka.

        8. कभी रवीश की रिपोर्ट ने हमारा भी ध्यान खींचा था लेकिन आजकल ndtvऔर रवीश दोनों ही बहुत नफरत भरी नकारात्मक पत्रकारिता पर उतर आये है। खुद ही अपनी मौत मर रहे हैं ये। सुशांत जी ने रवीश को आइना दिखा दिया है।

      2. अभी तुम बच्चे हो टोफी खाओ और मोदी की भक्ति करो .रविश की बात तुम्हे कुछ दिन बाद समझ मैं आये गी . और जहाँ तक रविश की बीमारी की बात करते हो तुम खुद अपने को देखो तुम्हये मोदिया बिंद है . कुछ घास फूस खाओ दिमाग ठीक रहए गा

    3. यही बिमारी है हम भारतीय लेगों में… इनका खुला खत पढ़ा और हो गए भावुक कि आपने सच्चाई सामने ला दी, फलाना कर दिया ढिमका कर दिया.. पर दोस्तों अपनी कोई भी सोच बनाने से पहले रविश कुमार के जवाब का इंतजार करें क्योकि एक तरफ की बात सुनकर बनाई गई राय कभी कारगर सिद्ध नहीं होती.. सो कृपा रविश कुमार के जवाब को पढ़ने के बाद हम सही नतीजे पर पहुंच सकते है

      1. रविश के खुले खत पर मोदी जी के उत्तर का इंतजार किसी ने नहीं किया और तुरंत राय बना ली। रविश सड़क पर गए । सारे भारतीय भावुक होकर रोने लगे। अब क्या होगा रविश के बच्चों का । अब किसी अन्य भावुक व्यक्ति ने रविश की पीड़ा और स्थिति पर अपने विचार क्या रखें कि भावुक भारतीय रविश के उत्तर का इंतजार करने की सलाह देने लगे । मेरा दर्द दर्द है और तुम्हारा दर्द बहाना । वाह मान्यवर अच्छी सोच है आपकी। जब रविश को अपनी बात कहने का हक है तो सुशांत को भी वही हक होना चाहिए। मेरा वाला दर्द पब्लिश होना चाहिए तुम्हारा वाला दर्द मात्र पब्लिसिटी स्टंट है । प्रतिभा बहुत है भारत में परंतु अवसर उपलब्ध नही । और जिनको अवसर मिल गया वो जगह जगह माइक हाथ में लेकर घूम घूमकर लोगों से पूछते फिरते है, “कौन जात हो ?”

    4. U have rightly diagnosed Ravish’s mental health, as someone who had been his colleague. He seems to be someone highly indoctrinated by NDTV and who is on a course to take the agenda to such ridiculous levels as to defy incredulity. And what, moreover, he is reveling in most is the swarm of chatterati elite giving a cozy circle around his pompous vaingloriousness. What his myopic vision can’t see is the eagerness of cozy elite club of people to seek out his company and comfort as much as he does theirs, which is purely borne out of a desperation to stay relevant.

    5. Ravish Kumar is doing remarkable job… Most of the news channels seem to be puppet in the hands of फेकु सम्राट…… The media has not maintained their standards since last 4-5 years which is really detrimental to the health of vibrant democracy.
      Moreover it has been fashionable to issue open letter to gain popularity…..you are doing the same thing over here……

    6. Wow I was waiting ki koi to aisa ho jo in rodu janab ka nakab utare….. koi to ho jo inki be sir pair ki chitthi tar tar kare….. ham jaise am log bahut kuch bolna chahte hain pr jab inki wall pr mai galiyan padhti hu to khud rokna padta hai…. bas ek wish ki sabko sach ka pata chale….. jay hind

  2. Ek bahut hi laajwab,umda or behatrin lekh.aapne unhe Sach me aaina Dikhaya h,ye log hi journalism ko Ganda kr rhe h. Agar inhone waqai sarkaar ki chamcha-giri na ki hoti to desh ko aaj haalat kuch or hoti.

    1. अरे सर सही क्या लिखा आप बहुत ही अच्छे तर्कों का सटीक तर्कों के साथ विश्लेषण किया है और उनकी बीमारी और उसका इलाज. सब कुछ बता दिया है खबीस कुमार जी को हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी बहुत-बहुत धन्यवाद सुशांत सर बिल्कुल आप जैसे खड़े होंगे तभी तो हल्ला मचाना बंद करेंगे नहीं तो यह उनको पता है मोदी जी पर कीचड़ उछालने से यह खुद को लीडर बनाना चाहते हैं और अपना आपको आने वाले दिनों में बिग बॉस या कुछ भी ऐसा करना चाहता है जो करोड़ों कमाए टीआरपी के चक्कर में है तब जानबूझकर अपने आप को बेचारा बनाकर यह दुनिया को ठगना चाहता है पर आप जैसे इनकी पोल खोलेंगे तो दुनिया समझ जाएगी बहुत-बहुत धन्यवाद एक बार फिर से सुशांत सिन्हा जी

    2. CC
      भाई ये रिबास कुमार साला सूअर का औलाद है … इसके जैसा हरामखोर इंसान नहीं देखा … इसके पास तो दोगलपन्ति कूट कूट कर बरी है ..

  3. Humlogon ko bhi lagta hai.. Ravis ki Report wale Ravis hee sahi the. Ye to Neta Ravis hain. Mayawi…Abhimani….wagairah…. Wagairah… 😀

  4. Ill is your mentality Mr. Sinha who finds no ill when whole society is openly been divided by RSS backed BJP leadership. This divide is being pushed further & further by media also. There is a certain way of saying things, Ravish is not afraid of his job but the way NDTV’s stake sale news & SM attack on Ravish is made, it is prudent to ask Head of the Govt. whose hate with NDTV is a known fact. He was/ is never afraid of but when you ask questions, they should convey the point & with loss of service & stake sale of NDTV he correctly pointed out that his voice can’t be silenced . He will ask questions from the road itself.
    It is a matter of depth & understanding which you don’t have. One who is raising question knows very well what he is saying & to whom & one who is being targeted knows why him & what is the being asked.
    As far as question of winning elections it is a known fact who are behind all this from demolition of Babri Masjid to May 2014 & with which motive they are working. Winning elections is no big game in India, all you need is fool people & I must say you could haven’t missed this fact & if you did miss it then there is no difference between you & ordinary illiterate who have no wisdom about personal & National issues. Then you are just doing service as per choice of your employer & do not enjoy as much as freedom as a journalist with his own mind.

    1. Typical comment by a khalistaani sympathizer, you guys r so predictable these days ,just by seeing your name I understood what u going to say .

      1. बिल्कुल सही पकडे आप ये खलिस्तानि आतंकवादी है इनको RSS देश तोड़ने वला लगता है और मुसलमान आतंकवादी वामपंथी देश जोडने वाले

      1. बडा बनना है तो एक सबसे अच्छा तरीका यह भी है कि कोई बडी सख्सियत को अपशब्द या आरोप-प्रत्यारोप का तीर चलाना शुरू कर दें,ये बेहद शौटकट् एवं थोडा कडे शब्द में कहा जाय तो घटियापन वाला अंदाज से अपना कद बडाना ही कहा जायेगा।कहाँ राजा भोज,कहाँ गंगुआ…तुझ जैसा …नाम नहीं लूंगा क्योंकि पत्र का आकार बेकार हो जायेगा।

        1. यही तो रवीश ने शुरू किया-बड़े बनने के लिए पीएम पर हमला!

    2. India is a market economy. Ek news channel jiska owner ravish kumar nahi hai uski sale ki news aati hai to govt kaise responsible hai iske liye ? Aapko govt nahi pasand to use criticize kijiye. Aap koi business karte hain aur vo business kisi wajah se aapko sale karna padta hai to usme govt ka kya role hai ?
      Aur agar fir bhi aap maante ho ki nahi pm is responsible for this then you should have guts to answer this letter with facts. Ant mein sirf ek baat jaisa standard aap doosro se chahte hai, log aapse bhi vaisa hi expect karte hain.

    3. अबे झंडू तू सब कुछ बोला एक बार ही कश्मीर के हिन्दू के बारे में कुछ नहीं बोला तुम ही उतना ही दोगला है जीतन राबिस कुमार है .

  5. I respect all media but request too much ek subject ke piche lagna the nahi Hai , aur fight ko bhi personal lena there nahi Hai
    2 4 logo ke too much fight se behad Zayada logo ka nuksaan hoga maximum are nutral and telented but zid type reporting theek kabhi nahi hoti , ha Kafi Channels tu bimaar Hai inke pass bhi kuch.log too much Hai per we avoid let them speak Kuch bhi we never listen to them as they are not fit for media but unnka Channels chalte rehnge koi ferkh nahi per NDTV Mai behad Zayada telented log uss jagah per Hai ke aab woh kahi aur ja nahi sakte
    Request please Kranti Kari personal level per.mat bano agar AAP Sach Hai tu Kiya chilana ya lagataar issues ko personal level nahi banao think for your Channels where people getting bread and butter

  6. कभी पत्रकारिता छोड़िएगा तो नेता बनने से पहले एक बार अभिनेता बनने पर विचार ज़रुर कीजिएगा, मुझे उसका कौशल भी दिखता है आपमे…..!! 😂 🙈👌

    शानदार….सिन्हा बाबू !!! 👍

    1. रविश कुमार के प्रापर्टी की जाँच होनी चाहिए ,ये पैसे के लिए देश को भी बेच सकता है ,इसकी राय देश द्रोही से मेल खाँती हैं !

  7. रविश कुमार सस्ती लोकप्रियता की चाह में इस कदर विक्षिप्तता के शिकार हो गए कि आने वाले समय में विरोधी तो क्या अपने भी थूक कर चले जायेंगे, जिस बकवास तरीके से देश की स्थिति व सरकार की कार्य प्रणाली को पेश करते हैं, मुझे यकीन है कि वो पूरे दिन का काम खत्म करने के बाद सोने से पहले खुद को नोचते होंगे।

    1. ये रिबास कुमार साला सूअर का औलाद है … इसके जैसा हरामखोर इंसान नहीं देखा … इसके पास तो दोगलपन्ति कूट कूट कर बरी है ..

      1. मुझे बड़ी खुशी होगी ये परंपरा अगर अपने पूर्वजो से सीखी तो नही होगी पर अपने संतान को ऐसी भाषा नहीं दिखाय

  8. Rubbish kumar is effected with superity complex. He is suggested to take advice of a good psychiatrist.
    Ranchi will be a better diagnostic centre for him.
    Just a good suggestion.

  9. आपने अपनी नौकरी जाने का कारण “मोदी को मीड़िया द्वारा आरोप मुक्त ना करना” बताया है। पर आपने कभी ये नही लिखा कि उसी वजह से मीड़िया ने कभी कांग्रेस को भी आरोप मुक्त नही किया है। पर आप ने उनके बारे मे कभी नही कहा इसलिए क्योकी आप पत्रकारिता के प्रति नही बल्की एक पार्टी संगठन और नेता के प्रति वफादार हैं। आपको निकाले जाने का सिर्फ एक पक्ष ही सामने आया है दूसरा नही।
    जिस वक्त आप नौकरी जाने की वजह से रवीश को कोश रहे हैं उसी वक्त आप खुद भी बेनकाब हो रहै हैं क्योकी आज आप जिस चैनल मे हैं उसका इतिहास वर्तमान पूरी दुनिया को मालूम का है। दीपक चौरसिया।।

    अगर पत्रकारिता के इस सबसे खराब दौर मे भी आपको सबसे खराब रवीश ही दिख रहे हैं तो माफ करियेगा पर इलाज की जरूरत आपको है रवीश को नही।

    अपनी कुंठा को दूसरे के बिमारी का नाम मत दो ।

    धन्यवाद
    आपका एक प्रशंसक जब आप NDTV मे थे

    यश त्रिवेदी ( राष्ट्रीय आलोचक)
    @yashukanpur
    Twitter ID

    1. मुझे बहुत ही आपके सामान्य ज्ञान पर गर्व है क्यों कि रविश जी अभी भी NDTV tv

    2. अरे वाह, यह राष्ट्रीय आलोचक आपने बहुत कम लिख दिया। अपनी टिप्पणी से तो आप ब्रह्माण्डीय आलोचक लगते हैं।

  10. भाई लगता है आप भी अर्णब गोबर स्वामी बन के ही दम लोगो।आप को नही लगता आप ये खत लिख कर सस्ती पब्लिसिटी कमाना चाहते हो।

  11. यह रविश कुमार बहुत बड़ा दोगला ओर सडयंत्रकारी पत्रकार है जनता जान चुकी है, आज आपने इसकी हकीकत जो सामने रखी है उससे इसकी दोगली सोच जनता के सामने आई है।। आपका धन्यवाद

  12. इस देशद्रोही धर्मद्रोही के बारे में – खुजली इस संसार में भांति भांति के लोग ! कुछ तो मादरजात है पर रेबीज कुमार बहुत ही मादरजात !! ब्राम्हण के नाम पर कलंक है??

  13. डिअर सिन्हा साहब,
    आपने कौन से मेडिकल कॉलेज से sychologist बनने की डिग्री ली है? आजकल आप बीमारी नापते चल रहे हैं! जब आपने डिग्री ले ही ली है तो ये भी बता दीजिए कि नीचे लिखे लोग कौन सी बीमारी से ग्रसित हैं?
    @ जिसने भारत की अर्थव्यवस्था की ऐसी की तैसी कर दी…
    @ जिसने रात 8 बजे नोटबन्दी के जरिये देशवासियों पर ही sergical strike की…
    @ वो नेता जिन्होंने कभी जनता से किया वादा निभाया ही नहीं। बैंक खाते में 15 लाख रुपए आये ही नहीं….
    @ जो जनता से किये वादों को जुमला साबित कर देता है….
    @ आप। आपने क्या किया मीडियाकर्मियों के लिए? कितने लोगों की नौकरी बचाई? कितनी सैलरी बढ़वाई?

    बस एक सवाल है…. कोई भी राजा हरिश्चंद्र तो है नहीं… तो सवाल सिर्फ ये हो सकता है कि कौन सा मीडिया संस्थान सबसे बढ़िया है, कौन सा mediaperson सबसे अच्छा है (आपको छोड़कर, क्योंकि आपके बारे में तो पता चल गया)? कौन सी सबसे अच्छी रिपोर्ट लगी अभी तक?

    1. Dear kabhi time mile toh Wo video mujhe bhejna jisme modi ne kaha ki sabke account me 15 lakh credit karunga.

      Nahi Bhokna Band kar dena iss Baat Par.
      Aur Dusri Baat congress wale toh iss GDP 7.5 ko he galat Mante thay ab Isko Q sahi Maan rahe hai.

      Ravish kisi ki Burai kare toh sahi aur uski koi Burai kare toh Galat aisi dogla panti laate kahan se ho.

      1. Bilkul sahi kaha aapne baton ko twist krna to koi inse sikhe ravish jara ye bhi to bata de ki wo bengal hinsha pr kyun nhi kabhi charcha krte.

    2. “विमौद्रिकरण” और “जी एस टी” पर मोदीजी के दर्द और विपक्ष के बेशर्मीभरे विरोध को कुछ यूँ भी समझा जा सकता है:-

      चमन को सींचने में पत्तियां कुछ झड गई होंगी,
      यही इल्जाम है मुझ पे चमन से बेवफाई का ।
      मसल डाला जिन्होंने कलियों को खुद अपने हाथों से,
      वे दावा कर रहें हैं अब चमन की रहनुमाई का ।
      एक स्वर में आवाज़ दो,”वी लव मोदी,वी लव नेशन”। वी लव जी एस टी एंड डिमोनीटाइज़ेशन।। जय हिंद।।

  14. I have not read a better article on rabbish until date, that too by an old colleague. Kudos Sushant for speaking the truth

  15. रवीश होने को बहुत गालियां सुननी पङती है। मुझे लगता है कहीं आप तो बीमार नहीं हो।

  16. सुशांत सिन्हा जी ,
    क्या खूब लिखा है आपने…
    अद्वितीय !!
    बधाई

  17. सुशांत भाई बेहतरीन,इंसान की खुद की कमजोरी का उसे अहसास कराना और बताना कि वो कैसे खुद को खुद का शिकार बना रहा है और दिखा रहा है कि उसे पता नही।

  18. रविश जी,
    अचछा बोलते और मुद्दे को उठाते है। पर सवक्ष और स्वस्थ पत्रकार कदापि नही।
    मानशिक संकीर्णताओ से ग्रसित दलाली को पत्रकारिता बनाकर जीने वाले लोग है।
    मोदी जिसको फ्लो करते है वो गलत है तो मोदी गलत और रविश का सगा भाई, बलात्कारी, दलाल, अपने कुनबे के एक नेता के लड़की को रैप करवाता था और ये ठग और निच न उससे रिस्ता तोडा न उसका भाण्डा फोडा, काहे का पत्रकार ढ़कोसला बाज़ मनोरोगी ‘टीवी-एंकर’

  19. तेरी कयनी तनख्वाह है? जल रही है के तुझे कोई कौड़ियों के भाव नहीं पूछता।

  20. सटीक टिप्पणी। दोगले पत्रकार की असलियत सामने लाने के लिए आपको धन्यवाद !

  21. Who is sushant sinha bhai ??
    Kon jaanta h tumhe yar ??
    Nobody knows you !!
    Don’t try to take unnecessary advantage in the shadow of Ravis Kumar.
    Pata nahi kaha kaha se aa jaate h . kaam karo tabhi limelight me aaoge !!

  22. सही है, रविश कुमार को गलतफहमी है कि अच्छा लेखन या लोकप्रिय वाचन ही सही होने की गारंटी है । रविश केजरीवाल की नकल कर शहीद होने का ढोंग कर आशुतोष बनना चाहता है। शाहि वो

  23. बहुत ही घटिया और व्यक्तिगत टिप्पणि हैं , सुशांत बाबू

  24. बहुत ही शानदार जवाब।
    रविश बाबू आज कल पत्रकार कम पक्षकार ज्यादा लगते हैं। दूसरों को गोदी मीडिया कहने वाले रविश बाबू खुद किसकी गोदी में बैठे हैं???
    खैर, ये पब्लिक है सब जानती है।
    मई 2014 के बाद से कुछ “नेताओं-पत्रकारों-बुद्धिजीवियों” के मन की घृणा अब खुल के सामने आने लगी है।

  25. आप अधिक बीमार हैं । जिस चेनल में हैं उसके क्या कहने । आपकी बातों से हीनता बोध झलक रहा है सिन्हा बाबू ।

  26. लाजवाब, शानदार, जबरदस्त
    लफ्ज़ कम हैं इस खुली चिट्ठी की तारीफ करने को। रविश कुमार पाण्डेय दूसरे की गलती बताने के लिए तो टीवी पर जम कर चीखते चिल्लाते हैं पर अपने बलात्कारी भाई ब्रजेश पाण्डेय की न्यूज बिलकुल ही बॉयकॉट कर देतें हैं।
    संभवत: एनडीटीवी के बिक जाने के बाद उन पर नौकरी जाने का भय छा गया है और इसी से वो अपना मानसिक संतुलन खो बैठै हैं।

  27. Thanks for writing to Mr. Ravish , you have done your bit as a former colleague . Hope he takes your advise in right spirit and takes due precautions. Get well soon Ravish

  28. Dear Sushant, you were too in NDTV with Ravish Kumar, why didn’t you write what you are writing now? If Ravish is having fear of loosing job, same fear was was also with you. Had it not been, then you must have been written about Ravish what you are writing now. But since you have been kicked out from(sorry to use this)get NDTV, you are finding it very easy to spill the beans now. So don’t get personal with him, and think again what you have written about him. Everyone fears from loosing job, you too feared and so does he. Don’t wash your dirty linen in public. It won’t help you, rather It would jeopardise your chance of going back in NDTV. 😊😊

  29. Whom about u Talking – Men With No Self Respect and Integrity – Only Hatred sponsered by his Boss and his narrow thinking – These type of man has no soul and spirit -only selfishness is their mota- They are Blind with Eyes wearing Dark Glasses

  30. दोस्त हम पहले मिल चुके है। आप मुझे जानते है या नाही ये तो नाही पता पर आपबे जो खत लिखा है उसकी मे प्रशंसा करता हु और आप की निडर ता का सन्मान करता हु। सच का सामना करना ऐसें लोगोकी फिदरत मे नाही है भाई।
    आज मुझे आपने उपर का विश्वास बढ गया इसका ऐहसास हो राहा है।
    ऑल दि बेस्ट दोस्त।।।

  31. आपने रविश के विषय मे इतना कुछ लिख दिया है जितना आजतक वो खुद भी नही जान पाए ।
    रविश जी बीमार हैं ये तो हम भी जानते थे लेकिन इतने बीमार हैं ये कोई नही जान पाया ।

  32. सुशांत बाबू कुछ और राष्ट्रवादी तरीका अपना लेते तो भी इतनी ही पब्लिसिटी मिल जाती अपने जाति बंधु को क्यों निशाने पर लिया ,क्योकि एक बात तय है ये फर्जी लोग आपका साथ कभी देंगे भरोसा नहीं पर एक पत्रकार जरूर देगा ।

  33. He wish to look like a superman, bur he isn’t. God has blessed him a good writing but u r wasting it by propogating our PM, it looks like other negative politicians who r fearing for their ministry. What u r fearing for ?

  34. How interesting and ofcourse, how opportune that Mr Sihna decided to write the open letter to Mr Kumar at this point of time! Wondering why he waited all these months to keep all the information to himself since he is so much concerned about Mr Kumar and still remains self-claimed well wisher he should have written about Mr Kumar sickness then only. In 2015 only Mr Sinha in an interview with one of the online media groups mentioned and I quote “जो रवीश कुमार टीवी पर हैं वही रवीश कुमार न्यूज रूम में भी हैं, उनकी बातों में कोई बनावटीपन नहीं है।” I guess Mr Sinha must have been `sick’ at that time or must of succumbed to management’s pressure to give such a statement. It is also possible that Mr Sinha’s assessment about Mr Kumar was totally off-mark even after working for him so long…which really speaks about Mr Sinha’s journalistic skills ! People who are sick still have hopes in their lives but what about you Mr SInha, how are you going to deal with so much professional jealousy that is reeking from your letter to Mr Kumar? But dont lose heart , keep trying harder – if nothing else this much you must have learnt from your senior Mr Ravish Kumar.

  35. ऐसा पत्र आप जैसे साथी पत्रकार ही लिख सकते थे सुशांत जी। वे तुलना भी करते हैं अपना तो मोदी जैसे प्रधानमंत्री से। अहंकार ऐसा कि किसी पत्रकार को भी अपने सामने नहीं रखते। ऐसे लोगों का हस्र क्या होता है यह इन्तजार का विषय है।

  36. सर आप इतना क्यों डर रहे है रवीश कुमार से , लगता है आम चुनाव आने से पहले थोड़ी घबराहट हो रही है | आप चाहते है कि चुनाव से पहले जनता थोड़ी समझदार ना हो जाये , अगर जनता रवीश कुमार जैसे लोगों की वजह से बोलने (समझदार) लग गई तो आप और आप जैसे पत्रकार लोगों का क्या होगा | आप का चिट्टी लिखने का मक़सद सिर्फ एक है टीवी पर जो दो चार पत्रकार है जो जनता की आवाज उठा रहे है उनको नीचा दिखाना । थोड़ा साहस करिए और सरकार से सवाल पूछिये क्या किया तीन साल मैं और आप डरते है तो डर भी एक बिमारी है साहब

  37. Shaandaar lekh,
    Ek ptrakaar ko kabi v kisi k purntaya khilaaf ya purntayaa favoured nahi ho jana chahiye…
    Aur , Ravish g ne aajkal kuch dino se jo halla machaya hua h wo to ab reaction karne laga h…
    Majedaar chitthi…..lazabab
    Weldone ….

  38. This is on dot .IT challenges hypocrisy of Ravish. I am using polite word.I don’t want to use word like a seasoned croo.you see one can not go down to level of Ravish who is important member contributing to now famous NDTV culture to say the least. Ravish finally you were asking for it a d you got it hard. Now go and apply burnol you lier…

  39. बहुत ही शानदार और प्रभावी खत ,रवीश कुमार को वाकई मोदी फोबिया नाम की बीमारी ने जकड़ा हुआ है,समय रहते इस बीमारी से बाहर आना जरूरी है‍‍ ।

  40. Sushant sir kitni baar thanks bole aapko samjh nai aata letter padh ke aisa laga ki isse aacha reply ravish jaise mansik diwaliya ko aur kuch nai ho sakta ;;behad satik aur tarksangat #

  41. Sir ravish ji ko kuch bhi salery mile magar wo desh ki janta ke liye sawaal utha rahe hai aapki tho salery kum hai aapko tho sarkaar se jyaada sawaal puchne chahiye magar wo kaam bhi ravish ji kar rahe hai lagta hai aapka aur modi ka same problem hai dono ko janta se kuch lena dena nahi hai bus personal frustration hai .sir kuch desh ke liye bhi kar lo thodi saanti milegi desh ko kuch chand logo (ambani,adani) ke hantho luthe mat dekho .

  42. सही कहा सुशांत सर आपने दो चेहरे रवीश कुमार के ये रिश्ता क्या कहलाता है….

  43. ये इंडिया टीवी जेटली जी के चेले रजत शर्मा वाला है तो हमें कुछ नि बोलना………बाकी आप खुद समझदार है।

  44. खुद को हद से ज्यादा अहमियत देना और महानता के भ्रमजाल में फंस जाना

  45. भैईयाज़ी, हम तो यही चाहते है कि एक पत्रकार सही को सही और ग़लत को ग़लत बताए, चाहे वो BJP हो या Congress.
    Thanks PatelBJP

  46. रवीश जी द्वारा एक पक्षीय रिपोर्टिंग उनकी प्रतिभा का जबरदस्त उदाहरण है। देश की बजाय व्यक्तियों के लिए उनकी आस्था भी जबरदस्त रूप से देखते बनती है। एक चाय वाले को प्रधानमंत्री बनाने में इन जैसे पत्रकारों और NDTV जैसे पूर्वाग्रही चैनलों का भी अद्भुत योगदान है। भारत और हिन्दू जगृति इनके बिना असम्भव सी थी। रवीश जी आप लगे रहिये। आप सही और स्वस्थ है।
    सिन्हा जी आप भी हलकान न होइए ये भी देश का काम ही करते बस स्टाइल जरा नेगेटिव है रवीश जी का। अपने ही आदमी है बस दूसरे खेमे में प्लांटेड से मानिए इन्हें। 😁😁😎😎👍👍

  47. Wow,excellent.such fearless display of media ethics .sir,truly n so politely u replied to the most arrogant face indian media has .a news anchor,so arrogant,who thinks questioning his arrogance is blasphemy n above the law,threat to media freedom n what not.the so called pro poor anchor,so evidently enjoying his “anti-modi” status symbol,is at the core so filthily suffering the multi personality disorder,that he is cut off reality way back n now blaming all others for making “shaan me gustakhi” to him

  48. बढ़िया लेख , लगे रहिये ,
    NDTV में आपको देख के दुख होता था ।

  49. Tumne Jo bhi likha he Ravish Kumar ke bare me ho sakta he isme kuch sachai bhi ho lekin tumhare lekh se ek bat to saaf ho Gaya ki kese Amit Shah jesa Ghoonda Teri Baja Rakhi he, aur kese tum apne baap se adhik feku ko asli baap samjh Raha he, tumhe nahi dikh Raha he ki Gauri Lankesh ki hatya kis Karan hua he, Nikhil Waghle ko kis Karan haraya Gaya, EPW me apne editor ko kis Karan hata Diya he, Pansare ki hatya kis Karan hua he,
    Asal me tumhe sab pata he aur Mujhe yaqeen he tum bhi us Hatyara se vaicharik tor sahmat ho jese tera asli baap feku Nathuram se vaicharik tor par sahmat he,
    Wese me Ravish Kumar ke bare me tumhare vichar as kuch had tak sahmat hun

  50. आप जैसे घटिया लोगो की घटिया सोचकि वजह से ही हमारा हिंदुस्तान आज बर्बाद हो रहा है अगर किऐमे हिम्मत है फेकूको जवाब देने की तो वो है सिर्फ और सिर्फ रवीश कुमार ।
    तुझे कोई जानता नही इसलिए तूने रवीश कुमार के नाम खुला खत लिखकर मोदी के अंध भक्तो में पॉपुलर होनेका अच्छा तरीका ढूंढ लिया

  51. Sushant sir.. apne to apane man ki bhadas nikali ravish sir pe… Ravish ji ne letter pm.ko likha.. as a journalist or as a citizen people hv expectations from The PM. Pm ka jawab nhi nd suddenly aap ko hi mirchi lagi…

  52. Bhai jo b baat hai ravish kumar saaf batata hai.. usme koi chatukarita ni hoti. Jaise aapne modi modi krke sara letter hi bhar fiya..
    Apko dukh ho rha hai ki ravish modi.ke piche pd gya.
    Bhai tere khne pr agr wo bimar h to muje tum usse b jyada bimar lg rhe ho.. jo itna bda latter likh diya. Psycho hi hoga jo khud itna bda latter likh kr dusro ko bimar bole.
    Sidhi baat hai aaap ravish jaise sache bn ni skte.

  53. गोस्वामी तुलसीदास ने रामायण मे एक चैपाई लिखी है जो जस करही सो तस फल चाखा ।धूल जब जमीन पर रहता है तो धुल होता है लेकिन वही धूल जब उपर उठता है तो इंसान का आँख खराब करता है ।आपके मित्र सुशान्त ने बताया कि 8लाख महीना वाला भी आं आदमी है ।उनका जबाब नही बल्कि उनके चिठ्ही मे सही रवीश को खोजेंगे और तब जनता को बताएँ।
    बहुत धन्यवाद….

  54. Sushant sir ….have u ever wrote a letter to your beloved PM for ….1) people killed due to demonetisation 2) orissa farmers are eating human flesh to show their problems 3) Problems for buisnesses due to three type of GST 4) muslims are killed due to cows by gau baghats 5) Black money bluffs to people nd where is 15 lakh per family 6) High price rise of petrol and disel 7) Students are beaten by ABVP goons in universities….8) why GDP of India fell down dramatically…..but these problems are nothing for you where innocent people are killed ….you have problem with ravish kumar letter to PM …..why …..what perks are you getting from modi ….in future your kids will ask u same questions….why you took stand for wrong and greedy political parties who destroyed india

  55. What an awesome writing. Robish kumar must read this post. i was big fan of Ravish kumar till 2013. but at present, I feel that, it was a big mistake.

    Any way thank you Mr. Sushant Sihna keep writing the good story with independent reporting.

  56. चचा ये पत्र लिख कर तुमने तो हमारी आंखे खोल दी। अपने पापा को भेजे की नहीं mail के थ्रू।भेज दो अच्छा लगेगा उनके दावत पे बुलाएंगे।

  57. आपका लेख शानदार है। रबीश कुमार क्यों परेशान है आप ने बता ही दिया है। अब यह भी बता दीजिए कि खुद को दल्ला बनने के लिए आपकी प्रोफाइल कितनी पाक आैर साफ है। हमने जिंदगी में बहुत से दल्ले मीडिया में देखे हैं। एक आैर देख लूंगा क्या फर्क पड़ता है।

  58. Kudos to you for showing mirror to such hypocritical self professed saviour of the poor. Journalists like him have brought shame to the profession. Using cheap tactics to gain publicity and promote their devious propoganda. This letter of yours has clearly brought their double standard in open. Amazing work!!!!
    Thanks a lot to you!!!

  59. People are suffering from modi phobia and calling others as sick. most of the journos who are criticising Raveesh were in NDTV. Journalism is now also lile politics of aayaram gayaram. Raveesh is atleast not like these buggers who shift there loyalties for money and fame.

  60. It is Indeed what’s written on letter.
    Well Done,Hope Mr. Satish will read this letter and learn something

  61. Dear Sushant ji
    Mujhe nahi pata ravish beemar hain ya dare huye hain ya sab publicity ke liye kahte hain haan itna jaroor kah sakta hu ki wo ek esa patrkaar he jo kisaano ke mudde uthata he, safai karmchariyon ki awaj bhi babta he youth ke liye bhi ladta he wo hindu muslim jese farji muddon se door rahta he, raja harichandra to koi nhi he par wo bakiyon se bahut behtar he itna yo sab jante hain.
    Or aap uske khilaf letter likhkar bas do char reweet le sakte ho usse jyada kuch nhi. He is still One of creadeble Ptrkar in main stream media.
    Regards
    Manoj Yadav
    Civil Engineer

  62. Apki bhi ek bimari hai sahab.
    Jalane ki bimari mat jalo Bhai ravish ki sari bimari SE bhari bimari hai yeh Jalan ki bimari .Barnol hamesha shath me rakho.pure chitti SE jalan ki by AA rahi hai

  63. The thoughts are never has a limited circumference, you can eashtablish any concrete ideas to the path way of national integrity. Why we always thought about individual circle, I can’t understand with these views.

  64. Sushant Sinha in your letter there is no substance only jealousy becuase Ravish is 100 time bigger than you in knowledge and popularity, you just did personal attack in this letter nothing else..

    Ravish letter to PM make sense because PM is answerable to every citizen of India, your letter to Ravish doesn’t make any logic.

  65. चलन हो गया अब तो दूसरी की बनाई हवा पर अपनी पतंग उड़ा लो !आपने भी उसमें कोई कसर नही छोड़ी । पर शायद आप अभी इस खेल में कच्चे हैं ।

  66. Media ka kaam vipakash ka hota hain woh Sarkar ki alochana kare taki Sarkar apna kaam imandari se kare Lekin India me aaj media bola hua hain woh Sarkar ki alochana nhi karta Balki uski marketing karta hain aur sirf 2014 se shuru hua hain UPA ke waqt humne dekha media ne har mudda utya petrol ke Sanam badh, mengai par, GDP par, antankwad par, Lekin yeah problem Abhi bhi hain par pata nhi media ise ab kyu nhi dekhati shayed ab yeah sab koi mudda hi nhi Raha kyuki hum indian Ko ab inki adat ho gayi hain, ravish ki jaise kuch reporter hain Jo Sarkar ki alochana karte hain toh aap jaise bikey hue Dalal reporter inke hi peeche pad jate hain taki ki cheap publicity pakar Sarkar ki Nazar me as jaye aur future me koi reward Paa sake, kam se kam apni reporter jamat ka khayel rakhte aur baat karte kisi ki personal life chitakashi darshata hain aap kitna mansikta hatash hain…aap jaise log hindutva Ko sponsor karte hain aur chahate hain Bharat ek hindu rashtra bane BJP ki divide and rule policy Ko aap jaise reporter log Janta ke beech le jate hain…jo bade Sharm ki baat hain.

  67. क्या कमाल का diagnosis है सर आपका, रवीश कुमार जी इन तीनो बीमारियों से जल्द ठीक हों, ये कामना हम उन्ही से करते है ।
    रवीश जी get well soon.

  68. An excellent reply to that self obsessed ,self proclaimed Masiha of downtrodden ..Ravish kumar..
    कौन जात हो।

  69. एक साथी ही होता है जो शायद किसी को सच्ची सलाह दे सकता है, सुशांत जी आपकी लेखनी के कुछ शब्द और वाक्य शायद आपके पूर्वसहकर्मी को अच्छे न लगें लेकिन वो कटुसत्य है। आपने पत्रकारिता को फिर से समाजसुधार की श्रेणी में ला कर खड़ा कर दिया है ।

    1. मैने कल ही लिखा था कि जब आप एकांगी भूमिका लेते हो , तो उसका परिणाम ऐसा ही होता है! सुशांत सिन्हा के बातों मे सचाई दिखाई देती है! मै ndtv का नियमीत दर्शक हु! लेकिन आज जिस तरह से रविश कुमार लिखते ओर बोलतेहै वैसे काँर्गेस के शासन काल मे बहुत कम दिखता था! आज कल जादा दिखने लगा है! तबसे मेरे मन मे अशंका आई ! उसका जवाब सुशांत सिन्हा ने दिया है !धन्यावाद

  70. किसी भी बिकाऊ इंसान को अधिकार ही नहीं होता की वो किसी के बारे में कुछ भी बोले अथवा कुछ लिखे क्योकिं उसकी प्रकर्ति बिकने की है और उसकी बोली हमेशा उसकी कीमत लगाने वालों के प्रति ही रहेगी जबकि रवीश में ऐसा कुछ नहीं है वो वही बोल रहा है जो वो पहले से ही बोलता आ रहा है आप अपनी कीमत के अनुसार बोल रहें हैं।

  71. प्रिय सुशांत जी,
    मुग्ध हो गया आपके धाराप्रवाह पत्र को बांच कर … पत्रलेखन के प्रति आपकी अनिच्छा और फिर पत्र लेखन को प्रस्तुत आप , उफ्फ आपकी यह स्प्लिट पर्सनालिटी !! रवीश कुमार के बच्चों को सड़क पर आप नहीं आने दोगे ?? हद दर्जे तक गिर गए हो आप , आखिर गोदी में जो जा बैठे हो !! सुशांत भाई , यह जो शब्दों को पिरोना सिखा है आपने यह तो पता चलता है कि रवीश जी के सहयोगी (गलती हो गई सहकर्मी ज्यादा मुफीद होगा) रहे हो लेकिन उन शब्दों का विषाक्त हो जाना यह भी बतलाता है कि आप अब गोदी सिर्फ चढ़े नहीं हो बल्कि मस्ती में झुला में झूल भी रहे हैं .. !!
    राष्ट्रवाद का इस बेवक्त उफान के पीछे कारण क्या हो सकता है …ईर्ष्या तो नहीं .. शायद रवीश का आपसे ज्यादा दरमाह पाना , या फिर उनकी पत्नी का नौकरी करना जबकि आपकी पत्नी शायद इस योग्य नहीं ?? या आपको एनडीटीवी से निकाले जाने (या आपके भाग जाने / कॉर्पोरेट अंदाज़ में “अ चेंज”) में आप कारण रवीश की योग्यता को मानते है ??
    पत्रकारिता का मूल उद्देश्य “सत्ता के निर्णयों पर संशय करना और शंकालु रहना” होना चाहिए जैसा कि हमने सुना है , अब यह नया तर्जुमा आपने सिखा होगा तो कह नहीं सकता की पत्रकारिता का अर्थ सत्ता संस्थान के कार्यों का “बिलबोर्ड” बनना होता है !!
    यह आपके ही पत्र का अंश है ” हो सके तो इस चिठ्ठी का जवाब भी मत दीजिएगा क्योंकि अभी आप बीमार हैं, आप इस चिठ्ठी को भी अपनी मार्केटिंग का जरीया बनाने लग जाइएगा बिना सोचे समझे” अब भाई इतना तो हम भी जानते हैं कि आप उसी गोदी सत्ता के अविभाज्य अंग हैं जो प्रश्न तो करती है पर जबाब लेना नहीं चाहती , डरती है वो सोंच जो जबाब सुनने को प्रस्तुत ना हो … बिकी है वो कलम जो एक पिता एक पति के भय को भी समाज सुधारक की दृष्टि से देखे , शर्मनाक है उस सहयोगी का आचरण जो अपने सहकर्मी के विरुद्ध साज़िश कर खुद के पुनर्स्थापना का मार्ग ढूंढे … और हां सुशांत भाई , जब कभी उपयोग हो जाने के बाद चुके हुए कारतूस बन जाना या फिर ईमान धिक्कारने लगे तो मुझे ज़रूर कहना आपकी रोटी का इंतजाम कर दूंगा,दो खाता हूँ एक आप खा लेना !!
    आपका शर्मिन्दा प्रशंसक
    राहुल आनन्द

    1. Mr. SinHa a quote for you: “News ke naam pe ho rahee Muse ki loot”.

      Awesome Reply. Laptop front says ” Patanjali Rice Sabse Nice” this line is more than enough to tell all about you Mr. SinHa :). I hope you do not carry feather saying “sold out correspondent”.

      Jisne paida kiya hai wo apne bachhon ko khilayega bhee. You don’t worry. I hope aap apne ghar ke supporting staff ko khana to khila he dete honge roj.(waise NCR mein diet calculate karne ka riwaz hai)

  72. जब मैंने लिंक देखि तब से ये अंदाजा हो गया था की ख़त में क्या होगा.और आपने मुझे बिलकुल भी निराश नही किया.डिट्टो वही लिखा जिसकी उम्मीद थी आपसे.जैसे तब तुम कहा थे,ऐसा हुआ तब क्यों नही बोले,वैसा हुआ तब साथ क्यों नहीं खड़े हुए वगेरह वगेरह…
    सर उन्हों ने जिस whtsapp ग्रुप की बात की उसके बारे में एक लफ्ज़ नहीं लिखा आपने,उन्होंने जिन ट्रोल की बात की जिसे pm फॉलो करते है उसके बारे में नही बोला और न ही उनको मिल रही धमकी यो का जिक्र आपने किया या उस पर खुलासा किया.
    किया होता तो बेलेंस ठीक रहता.जवाबी लेटर तो उसे ही कहते है न!!

    1. रविश कुमार जी,
      सादर प्रणाम,
      मेरे इस प्रणाम में उतना ही आदर और सम्मान है जितना आपके खुले पत्र में हमारे प्रधानमंत्री जी के लिए है। इसमें कोई संदेह मत कीजियेगा हालांकि आपको संदेह हो सकता है क्योंकि मै प्रधानमंत्री जी का एक भक्त हूं। और भक्तों के मामले में आप थोड़ा सख्त हैं।
      ख़ैर, आपका पत्र लाखों लोगों की तरह मैने भी पढा (आपकी तरह सार्वजनिक करने से पहले 8-10 बार नहीं पढ़ा) और जैसी आशा थी बिल्कुल वैसा ही पाया। एक बार फिर आपने अपनी शब्दों से खेलने वाली आपकी कला जो इतने वर्षों में बहुत शानदार तरीके से निखर गई है (विशेषरूप से पिछले 4 वर्षों में) का बहुत ही उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। वाकई बहुत अच्छा लिखा है।
      आपका पत्र पढ़कर बहुत आश्चर्य हो रहा है कि किस प्रकार वाट्सएप, फेसबुक और सोशल मीडिया पर आपको अपशब्द कहने वालों का उलाहना आप प्रधानमंत्री जी से बिल्कुल वैसे ही कर रहे हैं जैसे कि किसी कम्पनी के प्रचार करने वाले पोस्टर को गली-गली जा कर चिपकाने वाले उन दिहाड़ी के लड़कों (जिनको कोई ठेकेदार कहीं से भी पकड़ लाता है) की शिकायत कंपनी के मालिक से जाकर कर रहे हों कि भईया हमारी दीवार पर क्यों चिपका दिया ये तो साफ सुथरी पुती हुई थी।
      आपका दुःख और शिकायत बिल्कुल सही है रविश जी। प्रधानमंत्री जी को ऐसे लोगों को बिल्कुल भी फॉलो नहीं करना चाहिए जो किसी के भी लिए सार्वजनिक रूप से अपशब्दों या गाली-गलौज का प्रयोग करते हों। ये वाकई निंदनीय है मगर आप तो अति बुद्धिमान हैं रविश जी, इतना तो समझते ही होंगे कि प्रधानमंत्री जी ने उन्हें इसलिए तो फॉलो नहीं करना शुरू किया कि वो आपको गालियां देते हैं या उन्हें पहले से ही अनुमान था कि ये लोग भविष्य में देश के एक बहुत लोकप्रिय पत्रकार को गाली देंगे, चलो इन्हें फॉलो कर लेते हैं। प्रधानमंत्री जी को शायद उनमें कोई दूसरी बात अच्छी लगी होगी जिसके कारण वो लोग इतने भाग्यशाली बन गए कि देश के प्रधानमंत्री ने उन्हें फॉलो करना शुरू कर दिया। वैसे भी रविश जी आप तो दिनभर देश की राजनीति पर अपनी पैनी नज़र रखते हैं तो आपने ये भी महसूस किया होगा कि ये आजकल एक नया ट्रेंड है कि कोई किसी के भी साथ खड़ा हो जाता है बिना इस बात की परवाह किये कि जिसके साथ वो खड़ा है उसने पहले से कौन कौन से कारनामे किये हुए हैं। अब देखिए न, एक ईमानदार नेता जो एक लड़की के बलात्कारी और निर्मम हत्यारे के न केवल साथ खड़े होते हैं बल्कि सिलाई मशीन और रुपया-पैसा भी दे देते हैं और फिर आप भी उस नेता के साथ खड़े दिखाई देते हैं। एक छात्र दल देश को गाली देता है, चिल्ला-चिल्ला कर और अल्लाह से देश के टुकड़े-टुकड़े हो जाने की दुआएं मांगता है, कुछ लोग उनके भी साथ खड़े हो जाते हैं। मेरे विचार से देश को गाली देना आपको गली देने से भी ज़्यादा बुरी बात है। क्यों है न रविष जी? या फिर देवी-देवताओं को गाली देना ज़्यादा बुरा है? कहीं पढ़ा था कि गौरी लंकेश भी बड़ी आनंदित होती थी खुले आम देवी-देवताओं को गाली दे कर। अगर ऐसा करती थीं तो ये गलत था न? मुझे विश्वास है आपका जवाब हां है क्योंकि आप भी तो एक हिन्दू देशभक्त हैं कोई देशद्रोही तो हैं नहीं? एक और हैदराबादी नेता हैं जो ISIS के समर्थकों के पकड़े जाने पर उनके साथ खड़े हो जाते हैं। कहते हैं कि मै केस लडूंगा, मै बचाऊंगा इनको। एक बुजुर्ग नेता बलात्कार करने वाले लड़कों के साथ खड़े हो जाते हैं ये कहते हुए कि भाई गलती हो जाती है। एक आदमी तो प्रधानमंत्री को गाली देता है और कहता है कि ‘मोदी तेरी बोटी-बोटी कर दूंगा’। अब बताइये क्या इसके लिए राहुल गांधी को या सोनिया जी को चिट्ठी लिख दें? एक जनाब तो हमारी और आपकी भारत माता को डायन बोल देता है और उसके बाद मंत्री पद से नवाज़ा जाता है। और कितने उदाहरण दिए जाएं रविश जी आप तो खुद ही देश की राजनीति के इनसाइक्लोपीडिया हैं। अब इन सब का क्या कीजियेगा रविश जी? आजकल गाली देना भी tv पर आने और हिट होने का फार्मूला जो बन गया है। और माफ कीजियेगा, आप ही न्यूज़ वाले लोग बढ़ावा देते हैं इनको tv पर दिखा-दिखा के। देखिये न इन दो लोगों का नाम आपकी मेहरबानी से हो गया न मशहूर।
      तो मै कहना ये चाहता हूं कि प्रधानमंत्री जी भी गलती से गलत लोगों के साथ खड़े हो गए हैं मगर चिंता मत कीजिये ज़्यादा देर नहीं रहेंगे। और अब तो आपने खुला पत्र लिख के सुझाया है तो जल्दी ही सुधार होगा।
      एक बात और समझ नहीं आई कि आप प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री जी से पूछ रहे हैं कि क्या एक पत्रकार की जान लेना या उसकी नौकरी को खतरा पैदा करना प्रधानमंत्री के लिये उचित है। तो चिंता मत कीजिये प्रधानमंत्री जी न तो हत्यारे हैं और न ही हत्यारों के साथी और अगर इस बात पर आपको कोई संदेश हो तो उन लोगों से पूछ लीजिये जो उनको मौत का सौदागर कहते हैं क्योंकि वो अच्छे से जानते हैं कि अगर प्रधानमंत्री सच में मौत के सौदागर होते तो उन लोगों का भी सौदा कर ही देते। जहां सैकड़ों किये वहां 10 – 20 और सही। इसलिए ये चिंता मन से निकाल दीजिये। और रही बात आपकी नौकरी की तो उसके लिए भी निश्चिंत रहिये। आपने अब तक इतना कमाल का काम किया है अब तक कि बहुत सारे हैं ऐसे चैनल वाले जो आपको राजा बाबू बना के रखेंगे। वरना आप भी आम आदमी हैं, चुनाव लड़ियेगा और राजनीति tv के बाहर आकर करियेगा। सफलता निष्चित है।
      वो जो एक आदमी लिखा है आपके लिये कि ‘मर क्यों नहीं जाते’ उसको इतना गंभीरता से मत लीजिये। कभी कभी तो माँ भी अपने बेटे को झल्लाहट में कह देती है ‘जा मर जा’ तो क्या मर जाता है? या वो सच में चाहती है कि मर जाये। नहीं न? तो टेंशन मत लीजिये। कुंठित होगा बेचारा। गुस्से में लिख दिया। हो जाता है आदमी कभी-कभी ऐसा जब बहुत चिढ़ जाता है। आप भी तो झल्लाये थे न जब आपके चैनल पर बैन लगा था। उस दिन देखा था मैंने आपका वो मूक वाला समाचार। अच्छा था मगर झल्लाहट से भरा हुआ था।
      आपकी उम्र बहुत लंबी होगी। अभी कुछ ही दिन पहले मेरा एक दोस्त बोला कि उसने सपने में देखा कि रविश कुमार मर गए। तो मैंने उसको बताया कि कहीं लिखा था कि अगर सपने में किसी को मरा हुआ देखो तो असलियत में उस आदमी की आयु बढ़ जाती है। तो लीजिये हो गए न आप दीर्घायु। इसलिए चिंता न कीजिये। और उन लोगों से तो बिल्कुल मत डरिये जो आपको जान से मारने की धमकी देते हैं। आपने वो मुहावरा तो पढ़ा होगा न कि गरजने वाले बादल बरसते नहीं। ज़रूर पढ़ा होगा। हिंदी में तो आपको महारथ है।
      मारने वाले तो चुपचाप मार जाते हैं। हल्ला थोड़े मचाते हैं। देखिये न बेचारी लंकेश को। मार दिया बस। ख़ुदा उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।
      आप के पत्र में कुछ बातें ऐसी भी हैं जो आपकी बातों और आपके व्यक्तित्व के साथ मेल नहीं खा रहीं। एक ये कि मैने कई बार आपको tv पर ये कहते सुना कि ‘हम तो डरने वाले नहीं, हम सवाल तो पूछेंगे’ मगर इस पत्र में तो आपका डर साफ झलक रहा है। दूसरी बात ये कि आप सच बोलने वाले पत्रकार हैं। मगर आपने लिखा है कि आप प्रधानमंत्री जी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं और आप उनके शुभ चिंतक हैं। अब ये तो सब जानते हैं कि इसमें कितना सच है। हो सकता है ये आपने इसलिए लिख दिया हो कि हिंदी मीडियम स्कूलों में पत्र लिखने की प्रारंभिक और अंतिम लाइनें यही होती थीं।
      लगता है मेरा पत्र आपके पत्र से भी लंबा हो रहा है इसलिए बस ये कह कर समाप्त करता हूं कि आपका ये हिंदी में ये खुला पत्र लिखना मुझे बहुत अच्छा लगा। वरना कहाँ आज कल लोग चिट्ठी लिखते हैं? कम से कम आपके सहयोग से मरती हुई पत्र लेखन की कला को कुछ सांसें तो मिली। मै तो अनुरोध करूँगा, आगे भी लिखते रहिएगा। पत्राचार में अलग ही आनंद है।
      मैने पूरा प्रयास किया है कि कहीं भी कुछ ऐसा न लिखूं जिससे आपके मन को आघात पहुंचे। कुछ बुरा लगा हो तो कृपया क्षमा करें। प्रधानमंत्री जी से शिकायत मत कीजियेगा। अंत में एक और बात, मुझे आपके पत्र की वो चुटकुले जैसी लाइन बहुत मजेदार लगी जिसमें आपने लिखा कि कहीं आपके बच्चे सड़क पर न आ जाएं। संजोग देखिये मैने दो दिन पहले ही आपकी कुल संपत्ति के बारे में इंटरनेट पर पढ़ा। अगर न पढा होता तो मै तो आपके इस ‘सड़क’ वाले मज़ाक को समझ ही नहीं पाता। आप नि:सन्देह शब्दों के जादूगर हैं।

      ईष्वर आपको लंबी आयु और अच्छा स्वास्थ्य दे।

      आपका आलोचक
      अवधेश गुप्ता

  73. hahaha ….kon likh raha hai zara dekhiye..! Aap aur aapka channel toh kaiyo ko piche pehle hi chhod chuka hai BJP ko bachane me. Warna chunav ke thik pehle aap ki adalat me modi ji ko bulakar unka prachar nahi kiya jata.

  74. Ravish Kumar ko to ek baar me mai, ek aam aadmi hi
    , Benakaab Kar sakta hu,
    Zaroorat Hai to bas ek live show ki.
    Challenge manjoor Hai to NDTV se guzarish Hai ki mere 5 sawalon ka jawaab juta Lena.

    Sawaal to hazaron Hai but mere 5 sawaal tumhare liye kafi Hai.

  75. सिन्हा साहब, रविश जी को आप जैसे प्रतिभावान पत्रकारों से डर है उनको डर हमेशा रहता है कही मेरी मठाधीशी छीन न जाये, इसी बात को लेकर परेशान रहते है रात को 9 बजे क्यो कोई एंकर कोट पेंट पहनकर मुझे कांउन्टर करे !
    मैं जो बोलता हूं वही सही है बाकी पत्रकार गोदी में बैठा है ये गलतफहमी रविश जी पाल रखा है, 9 बजे वाले एंकर से सबसे ज्यादा फटी परी है रविश जी को,
    उनके नज़रिये से देखे तो पूरा देश 3 साल में डूब गया है कही कुछ सही नही है बस किसी तरह कांग्रेस की सरकार आनी चाहिए

  76. 1. आज भारतीयों का आध्यत्मिक स्तर अर्थात स्वभाव का स्वाभाविक स्तर इतना गिर गया है कि हम परस्पर श्रद्धा एवं विश्वास को खो चुके हैं और राग एवं द्वेश से भरपूर हो गये हैं. इसका परिणाम है कि हम किसी भी तथ्य का विश्लेषण करते समय उसके उभयपक्षी भाव को समझने-समझाने में असफल हैं बल्कि किसी एक पक्ष के प्रति राग-अनुराग की मानसिकता अपनाते हैं तो उसके प्रतिपक्षी भाव को विपक्षी भाव समझ कर उन विचारों के प्रति द्वेष भाव अपना लेते हैं. यह बाला बुद्धि, बचपना, अपरिपक्व मानसिकता है. इस मानसिकता यानी मानसिक दुर्बलता को यानि मानसिक विकार को खाद-पानी दलीय राजनीति से मिलता है. 2 दूसरा तथ्य आर्थिक है. आज हम इकोनोमिक्स, जिसमे भावों का परस्पर आदान-प्रदान सम रहता के स्थान काम-अर्थ यानि कॉमर्स को अपना चुके हैं. कॉमर्स उस मानसिकता का नाम है जिसका लक्ष्य होता है; मेरा काम होना चाहिए, मेरा अर्थ (वित्तीय हित और स्वार्थ ) पूरा होना चाहिए , सामने वाला या दुनियां जाये भाड़ में . 3. तीसरा बिंदु है धर्म — अपने जॉब के प्रति कर्तव्य एवं अधिकार, जिम्मेदारी एवं हक़, के योग का नाम धर्म है. लेकिन जब धर्म का सम्बन्ध जॉब से हटकर पाखण्ड से हो जाता है तब रागद्वेष वह इकोनोमिक्स के स्थान पर कोमर्स हो जता है. जैसे की धार्मिक तथ्यों और भगवान शब्द का भी व्यापार होने लग जाता है.
    इस तरह आज हमें एक ऐसी अवधारणा की आवश्यकता है जो तीनों विषयों को एक साथ लेकर परिवर्तन करे. यहाँ रवीश कुमार उभयपक्षी अध्ययन के स्थान पर एक का विपक्षी होकर सोचने लगे हैं.

  77. प्रिय सुशांत जी,आपकी लेखनी से निकले हर शब्द से अधिकांश भारतीयों के मन की बात झलक रही है और रविश कुमार को यह समझ में आ जाना चाहिए कि केवल इसका मत ही मायने नहीं रखता, मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना हम सभी मोदी भक्त भी करते हैं परन्तु एक नेता के तौर पर सम्मान भी |हिन्दू राष्ट्र में हिन्दू विरोधी अभियान अनादि काल तक नहीं चलेगा, मोदी होगें तब भी, या नहीं होंगे तब भी | जय श्री राम |

  78. शायद रविश जी स्वयं को मोदी के विरोध में कुशल वक्ता और विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित करने का मूड बना लिया था।

  79. मेरा सभी पत्रकारों और सुशांत जी से विनम्र निवेदन है कि जब भी कभी और कहीं किसी भी संस्थान या साथी से शिकायत है तो उस संस्थान में रहते हुए इन कमियों को उजागर करें तो ज्यादा बेहतर असर होगा क्योंकि इससे आपकी साफगोई ज्यादा दिखेगी क्योंकि अगर सभी हामिद अंसारी, आर के सिंह ,एम जे अकबर, जगदंबिका पाल और न जाने कितने अनगिनत लोगों की तरह अगर सारे सुख देखने के बाद कोई किताब या पोस्ट लिखी जाती है तो ये एक स्वामिभक्ति का सबूत के तौर पर ज्यादा प्रतीत होता है

    धन्यवाद

    1. रविश कुमार जी,
      सादर प्रणाम,
      मेरे इस प्रणाम में उतना ही आदर और सम्मान है जितना आपके खुले पत्र में हमारे प्रधानमंत्री जी के लिए है। इसमें कोई संदेह मत कीजियेगा हालांकि आपको संदेह हो सकता है क्योंकि मै प्रधानमंत्री जी का एक भक्त हूं। और भक्तों के मामले में आप थोड़ा सख्त हैं।
      ख़ैर, आपका पत्र लाखों लोगों की तरह मैने भी पढा (आपकी तरह सार्वजनिक करने से पहले 8-10 बार नहीं पढ़ा) और जैसी आशा थी बिल्कुल वैसा ही पाया। एक बार फिर आपने अपनी शब्दों से खेलने वाली आपकी कला जो इतने वर्षों में बहुत शानदार तरीके से निखर गई है (विशेषरूप से पिछले 4 वर्षों में) का बहुत ही उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। वाकई बहुत अच्छा लिखा है।
      आपका पत्र पढ़कर बहुत आश्चर्य हो रहा है कि किस प्रकार वाट्सएप, फेसबुक और सोशल मीडिया पर आपको अपशब्द कहने वालों का उलाहना आप प्रधानमंत्री जी से बिल्कुल वैसे ही कर रहे हैं जैसे कि किसी कम्पनी के प्रचार करने वाले पोस्टर को गली-गली जा कर चिपकाने वाले उन दिहाड़ी के लड़कों (जिनको कोई ठेकेदार कहीं से भी पकड़ लाता है) की शिकायत कंपनी के मालिक से जाकर कर रहे हों कि भईया हमारी दीवार पर क्यों चिपका दिया ये तो साफ सुथरी पुती हुई थी।
      आपका दुःख और शिकायत बिल्कुल सही है रविश जी। प्रधानमंत्री जी को ऐसे लोगों को बिल्कुल भी फॉलो नहीं करना चाहिए जो किसी के भी लिए सार्वजनिक रूप से अपशब्दों या गाली-गलौज का प्रयोग करते हों। ये वाकई निंदनीय है मगर आप तो अति बुद्धिमान हैं रविश जी, इतना तो समझते ही होंगे कि प्रधानमंत्री जी ने उन्हें इसलिए तो फॉलो नहीं करना शुरू किया कि वो आपको गालियां देते हैं या उन्हें पहले से ही अनुमान था कि ये लोग भविष्य में देश के एक बहुत लोकप्रिय पत्रकार को गाली देंगे, चलो इन्हें फॉलो कर लेते हैं। प्रधानमंत्री जी को शायद उनमें कोई दूसरी बात अच्छी लगी होगी जिसके कारण वो लोग इतने भाग्यशाली बन गए कि देश के प्रधानमंत्री ने उन्हें फॉलो करना शुरू कर दिया। वैसे भी रविश जी आप तो दिनभर देश की राजनीति पर अपनी पैनी नज़र रखते हैं तो आपने ये भी महसूस किया होगा कि ये आजकल एक नया ट्रेंड है कि कोई किसी के भी साथ खड़ा हो जाता है बिना इस बात की परवाह किये कि जिसके साथ वो खड़ा है उसने पहले से कौन कौन से कारनामे किये हुए हैं। अब देखिए न, एक ईमानदार नेता जो एक लड़की के बलात्कारी और निर्मम हत्यारे के न केवल साथ खड़े होते हैं बल्कि सिलाई मशीन और रुपया-पैसा भी दे देते हैं और फिर आप भी उस नेता के साथ खड़े दिखाई देते हैं। एक छात्र दल देश को गाली देता है, चिल्ला-चिल्ला कर और अल्लाह से देश के टुकड़े-टुकड़े हो जाने की दुआएं मांगता है, कुछ लोग उनके भी साथ खड़े हो जाते हैं। मेरे विचार से देश को गाली देना आपको गली देने से भी ज़्यादा बुरी बात है। क्यों है न रविष जी? या फिर देवी-देवताओं को गाली देना ज़्यादा बुरा है? कहीं पढ़ा था कि गौरी लंकेश भी बड़ी आनंदित होती थी खुले आम देवी-देवताओं को गाली दे कर। अगर ऐसा करती थीं तो ये गलत था न? मुझे विश्वास है आपका जवाब हां है क्योंकि आप भी तो एक हिन्दू देशभक्त हैं कोई देशद्रोही तो हैं नहीं? एक और हैदराबादी नेता हैं जो ISIS के समर्थकों के पकड़े जाने पर उनके साथ खड़े हो जाते हैं। कहते हैं कि मै केस लडूंगा, मै बचाऊंगा इनको। एक बुजुर्ग नेता बलात्कार करने वाले लड़कों के साथ खड़े हो जाते हैं ये कहते हुए कि भाई गलती हो जाती है। एक आदमी तो प्रधानमंत्री को गाली देता है और कहता है कि ‘मोदी तेरी बोटी-बोटी कर दूंगा’। अब बताइये क्या इसके लिए राहुल गांधी को या सोनिया जी को चिट्ठी लिख दें? एक जनाब तो हमारी और आपकी भारत माता को डायन बोल देता है और उसके बाद मंत्री पद से नवाज़ा जाता है। और कितने उदाहरण दिए जाएं रविश जी आप तो खुद ही देश की राजनीति के इनसाइक्लोपीडिया हैं। अब इन सब का क्या कीजियेगा रविश जी? आजकल गाली देना भी tv पर आने और हिट होने का फार्मूला जो बन गया है। और माफ कीजियेगा, आप ही न्यूज़ वाले लोग बढ़ावा देते हैं इनको tv पर दिखा-दिखा के। देखिये न इन दो लोगों का नाम आपकी मेहरबानी से हो गया न मशहूर।
      तो मै कहना ये चाहता हूं कि प्रधानमंत्री जी भी गलती से गलत लोगों के साथ खड़े हो गए हैं मगर चिंता मत कीजिये ज़्यादा देर नहीं रहेंगे। और अब तो आपने खुला पत्र लिख के सुझाया है तो जल्दी ही सुधार होगा।
      एक बात और समझ नहीं आई कि आप प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री जी से पूछ रहे हैं कि क्या एक पत्रकार की जान लेना या उसकी नौकरी को खतरा पैदा करना प्रधानमंत्री के लिये उचित है। तो चिंता मत कीजिये प्रधानमंत्री जी न तो हत्यारे हैं और न ही हत्यारों के साथी और अगर इस बात पर आपको कोई संदेश हो तो उन लोगों से पूछ लीजिये जो उनको मौत का सौदागर कहते हैं क्योंकि वो अच्छे से जानते हैं कि अगर प्रधानमंत्री सच में मौत के सौदागर होते तो उन लोगों का भी सौदा कर ही देते। जहां सैकड़ों किये वहां 10 – 20 और सही। इसलिए ये चिंता मन से निकाल दीजिये। और रही बात आपकी नौकरी की तो उसके लिए भी निश्चिंत रहिये। आपने अब तक इतना कमाल का काम किया है अब तक कि बहुत सारे हैं ऐसे चैनल वाले जो आपको राजा बाबू बना के रखेंगे। वरना आप भी आम आदमी हैं, चुनाव लड़ियेगा और राजनीति tv के बाहर आकर करियेगा। सफलता निष्चित है।
      वो जो एक आदमी लिखा है आपके लिये कि ‘मर क्यों नहीं जाते’ उसको इतना गंभीरता से मत लीजिये। कभी कभी तो माँ भी अपने बेटे को झल्लाहट में कह देती है ‘जा मर जा’ तो क्या मर जाता है? या वो सच में चाहती है कि मर जाये। नहीं न? तो टेंशन मत लीजिये। कुंठित होगा बेचारा। गुस्से में लिख दिया। हो जाता है आदमी कभी-कभी ऐसा जब बहुत चिढ़ जाता है। आप भी तो झल्लाये थे न जब आपके चैनल पर बैन लगा था। उस दिन देखा था मैंने आपका वो मूक वाला समाचार। अच्छा था मगर झल्लाहट से भरा हुआ था।
      आपकी उम्र बहुत लंबी होगी। अभी कुछ ही दिन पहले मेरा एक दोस्त बोला कि उसने सपने में देखा कि रविश कुमार मर गए। तो मैंने उसको बताया कि कहीं लिखा था कि अगर सपने में किसी को मरा हुआ देखो तो असलियत में उस आदमी की आयु बढ़ जाती है। तो लीजिये हो गए न आप दीर्घायु। इसलिए चिंता न कीजिये। और उन लोगों से तो बिल्कुल मत डरिये जो आपको जान से मारने की धमकी देते हैं। आपने वो मुहावरा तो पढ़ा होगा न कि गरजने वाले बादल बरसते नहीं। ज़रूर पढ़ा होगा। हिंदी में तो आपको महारथ है।
      मारने वाले तो चुपचाप मार जाते हैं। हल्ला थोड़े मचाते हैं। देखिये न बेचारी लंकेश को। मार दिया बस। ख़ुदा उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।
      आप के पत्र में कुछ बातें ऐसी भी हैं जो आपकी बातों और आपके व्यक्तित्व के साथ मेल नहीं खा रहीं। एक ये कि मैने कई बार आपको tv पर ये कहते सुना कि ‘हम तो डरने वाले नहीं, हम सवाल तो पूछेंगे’ मगर इस पत्र में तो आपका डर साफ झलक रहा है। दूसरी बात ये कि आप सच बोलने वाले पत्रकार हैं। मगर आपने लिखा है कि आप प्रधानमंत्री जी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं और आप उनके शुभ चिंतक हैं। अब ये तो सब जानते हैं कि इसमें कितना सच है। हो सकता है ये आपने इसलिए लिख दिया हो कि हिंदी मीडियम स्कूलों में पत्र लिखने की प्रारंभिक और अंतिम लाइनें यही होती थीं।
      लगता है मेरा पत्र आपके पत्र से भी लंबा हो रहा है इसलिए बस ये कह कर समाप्त करता हूं कि आपका ये हिंदी में ये खुला पत्र लिखना मुझे बहुत अच्छा लगा। वरना कहाँ आज कल लोग चिट्ठी लिखते हैं? कम से कम आपके सहयोग से मरती हुई पत्र लेखन की कला को कुछ सांसें तो मिली। मै तो अनुरोध करूँगा, आगे भी लिखते रहिएगा। पत्राचार में अलग ही आनंद है।
      मैने पूरा प्रयास किया है कि कहीं भी कुछ ऐसा न लिखूं जिससे आपके मन को आघात पहुंचे। कुछ बुरा लगा हो तो कृपया क्षमा करें। प्रधानमंत्री जी से शिकायत मत कीजियेगा। अंत में एक और बात, मुझे आपके पत्र की वो चुटकुले जैसी लाइन बहुत मजेदार लगी जिसमें आपने लिखा कि कहीं आपके बच्चे सड़क पर न आ जाएं। संजोग देखिये मैने दो दिन पहले ही आपकी कुल संपत्ति के बारे में इंटरनेट पर पढ़ा। अगर न पढा होता तो मै तो आपके इस ‘सड़क’ वाले मज़ाक को समझ ही नहीं पाता। आप नि:सन्देह शब्दों के जादूगर हैं।

      ईष्वर आपको लंबी आयु और अच्छा स्वास्थ्य दे।

      आपका आलोचक
      अवधेश गुप्ता

  80. Very rightly trolled in the social media as “Mr. Rubbish Kumar “.
    He already has more attention and importance than he deserves. Let’s ignore what is rubbish and move ahead to make better sense.

  81. रवीश कुमार कुछ तथाकथित सेक्युलर पार्टी के मोहरे बन गए हैं, कुछ पोस्ट उनके नाम से मोदी विरोधी डालते है सोशल मीडिया में, और ये अभिभूत हो जाते हैं, काफ़ी पब्लिसिटी भी मिली है. लेकिन एक सच ज़रूर है की ये व्यक्ति ना तो पारदर्शी है और ना ही निष्पछ। जैसा कि ये हमेशा दावा करते हैं ।

  82. सुशांत जी, बेहतरीन पत्र लिखा है आपने। आपके पत्र से एक बात बिल्कुल स्पष्ट हो जाती है कि रवीश कुमार जो खुद को सबसे प्रतिभावान पत्रकार समझते हैं उनसे कहीं ज़्यादा प्रतिभा आप में या और भी कई लोगों में है मगर अफसोस कि सब इतने भाग्यशाली नहीं होते जिनको अच्छा अवसर और पहचान मिल सके। ऐसे में एक कहावत याद आती है कि घोड़ो को नहीं मिल रही घास और गधे खा रहे च्यवन प्राश।
    वैसे एक पत्र मैने भी लिखा था रविश जी के पत्र के उत्तर में मगर कोई प्लेटफ़ॉर्म नहीं मिल रहा जहां उसे लगा सकूं और रविश जी तक पहुंचा पाऊं।
    ख़ैर, ईष्वर आपको हर खुशी दे।

    अवधेश गुप्ता

  83. किस जात के हो तुम?

    रबिश कुमार जिनके अग्रज कांग्रेस से चुनाव लड़ते हैं और टाइम पास में उनके ऊपर रेप का भी आरोप लगता है लेकिन दुनिया की सारी बुराई तो मोदी और बीजेपी में है ☺️☺️☺️☺️

  84. सुशांत जैसे गधोंकी बात नहीं सुननी चाहिए.
    मैंने तो ये लडकेका नाम ही पहली बार सुना.
    बाप के प्रति संवेदना सबके साथ बांटी तो उसमें रविशने गलत क्या कहा. सुशांत बाहुक metaphor के बारेमें भी कुछ जानता है कि नहीं?
    रविश रविॆश हैं…तुज़से बहोत उपर.

  85. सुशांत,
    किसीको बिमार बताना ज़ुर्म हैं. वो भी मोदी चमचा बनकर.
    रविशको defamation case करना चाहिए.

  86. Ye hai kaun?? Are bhai kitne mein bike ho ? Tumhara Channel chal nahi rha kya? Accha tarika hai figure out yaa kah lein limelight mein aane ka. Apne kaam par dhyaan dijiye , aap bhi mehanat kar Ravish ji jaisa accha patrkaar ban sakte hain.

  87. Extremism is not a good thing in any form. Sushan and The managing director of NDtv seem to be extremist in their thoughts. fist bhagt and the second nastik. however, what ravish’s fault is his silence over those matter which you talked about (if those are true). but are not trying to use ravish to publicize yourself

  88. “पीएम को चुनौती देकर आप हीरो दिखते हैं, मैनेजमेंट को चुनौती देकर नौकरी जाने का खतरा रहता है”
    रवीश कुमार को बेनकाब करने के लिए इतना ही काफी है।
    जोरदार लिखा है सुशांतजी आपने।

  89. बीमार हमे तुम लग रहे हो जल्द किसी पागल खाने में प्रवेश लेलो बचाव मुमकिन है।

  90. Bhai…maaf kariyega…par aapki baaton se aisa laga jaise…bimaari ravish ko nahi aapko hai….jaahiliyat ki bimaari….ya fir unka sehkarmi hone k bawjood bhi safal na hone k frustration ki bimaari….ya fir koi aur bimaari…
    Poora khat to nahi padhe…par shuru ka thoda ansh padhte hi samajh gaye ki aap frustratiya Gaye hain…
    Pehli cheez….ek aadmi Jo sahitya se juda raha hai…usne agar apne pitaji k liye ek patra jisme usne apni sachhi bhavnayein vyakti ki hain share kar diya to wo bimaar ho gya…fir aap Mahakavi Nirala k baare me kya kahenge ? Ya aur bhi bht se lekhakon k baare me jinhone atmakatha likhi hai ya fir apni premika , maa ya baap k baare me likha hai….BHAVANI PRASAD MISHRA JI ki ek kavita Yaad aa rahi hai …..”aj paani gir raha hai, bht paani gir raha hai….” Padhiyega ….
    NDTV private company hai….nischit hi profit uska mool uddeshya hoga…koi samaj sevi sangathan to hoga nahi, to agar aapki baat sach hai ki kuchh logon ki chhatni hui ( mujhe nahi pata Aapke baat me sach kitna hai) to isme ravish kya karenge…bhaiyya company loss me jaati hai…to maaalik kuchh logon ko nikalte hain jisse company thode paise bacha sake….aur ye faisla company k maalik lete hain….to isme ravish kya bolenge….kyunki wo khud bhi to employee hi hain….
    Baaaki itna type karne ka adat Nahi hai humara…meri kisi baat ko chhati par mat lijiyega…
    Hum aapka frustration samajh sakte hain…
    Competition bht hai…
    Sab frustrated hai…
    Ka kijiyega….

  91. Koi Fark nahi padega sushant ye log ahankar me it mast Hai ki Kal ae aap ko hi godi media kahana suru Kar dege.

  92. एकदम सही बात लिखे हैं सुशांत भाई… लेकिन आप उस बात का जिक्र करना तो भूल ही गए, जब Khabar.ndtv.com को रवीश ने अपना ब्लॉग बना दिया था। ऊपर के दो स्क्रॉल में सिर्फ रवीश होते थे और तीसरे स्क्रॉल में जाकर खबर मिलती थी। तब ऐसा लगता था जैसे वेबसाइट का नाम ravish.ndtv.com है Khabar.ndtv.com नहीं… और उस ‘शहीद’ वाली घटना ने अंदर तक कचोट दिया था, बात भी उठायी लेकिन सुनी नहीं गई। तभी सोच लिया था कि ऐसी छोटी सोच वालों के साथ ज्यादा दिन काम नहीं करना…

  93. बहुत सटीक और संतुलित

    बाकई रविश की रिपोर्ट वाले रविश कहीं खो गया….

  94. इस बेचारे की नोकरी चली गयी है ।
    मैं आप का दर्द समझता हूं।

  95. Dear Ravish Jee,
    Please remember your days! “Ravish Ki Report”. It was awesome!
    Sushant has shown you the mirror!

    Aaina mujse meri paheli si surat mange-3
    Mere apne meri hone ki nishani maange
    Aaina mujse mari paheli si surat mange

    Mein bhatakata hi raha dard ke viraane mein
    Waqt likhta raha chere pe har pal ka hishab
    Meri shorat meri diwangi ki nazar hui
    Pi gayi may ki bolte meri geeto ki kitab
    Aaj lauta hoon tu hasne ki ada bhool gaya
    Yeh sahar bhoola muje mein bhi ishe bhool gaya
    Mere apne meri hone ki nishani mange
    Aaina mujse meri paheli surat mange

    Mera fan phir muje bazaar mein le aaya hai
    Yeh vo jagah ke jahan mero vafa bikate hain
    Baap bikate hain aur lakhte jigar bikate hain
    Kookh bikati hain dil bikate hain sar bikate hain
    Is badalti hui duniya ka khuda koi nahin
    Saste daamo pe yahan roz khuda bikate hain

    Har kharidaar ko bazaar mein bikataa paya
    Hum kya paayenge kisi ne yahaan kya paayaa
    Mere aheshas mere phool kahin aur chale
    Bol pujaa meri bachi kahin aur chale aur chale

  96. ये तो मुझे पता था कि रवीश ढोंगी है लेकिन इस दर्जे का ढोंगी है, ये नही पता था।।

  97. India TV ki news dekhkar samajh aata hai ki aap kya Hain aur kaisay Hain.
    Ravish Kumar toh dimagi beemar Hain chaliye,aap apni baat keejiye.Aap ye India TV par circus news kab band karenge,aap toh Buddhimaan Hain fir.

  98. सुशांत जी में आपके विचारों से सहमत हूं। लेकिन आप अपके लिखे लेख के इस अंश को”आपको याद है न कि कैसे एक दिन अचानक एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर ने फरमान सुना दिया था कि देश के लिए जान देने वाले और शहीद होनेवाले सैनिक को हम ‘शहीद’ नहीं कहेंगे और न हीं लिखेंगे बल्कि उसे ‘मर गया’ बताएंगे। ऊपर से लेकर नीचे तक हड़कंप मच गया था कि देश के लिए जान कुर्बान करनेवाले सैनिक के प्रति इतना असम्मान क्यों? ”
    पढ़ कर बड़ा दुख हुआ कि कैसे देश के एक स्तम्भ ने देश के रखवालों का असम्मान किया। क्या आप मुजे बताएंगे कि उस मैनेजिंग डाइरेक्टर का क्या हुआ? क्या उसे कोई सजा दी गयी या उसका आपके चैनल ने बहिस्कार किया?? क्योंकि ऐसे लोगो का इतने बड़े पद पर रहना कदापि उचित नही है। यदि अभी भी वो व्यक्ति उस औधे पर कायम है तो कृपया उसको तात्काळ उस पद से हटा कर उसकी औकात उसे बता दीजिए।। आशा करता हु आप भी रवीश नही बनेंगे। धन्यवाद

  99. Hard hitting reply to Ravish’s letter…..
    I was earlier fan of Ravish’s prime time show. But he has degraded himself over the time. He is not neutral but overly left leaning journalist. Blindly opposing everything that government does.

  100. जिनके लिए लिखा गया, जिसने लिखा उनकी सेहत का तो पता नहीं लेकिन पत्र में जो सोच है वह बीमार है – वह आज की मीडिया में फैली उसी बिमारी से पीड़ित है जिसने हम दर्शको/पाठको को त्रस्त कर रखा है. सुशांत सिन्हा का पत्र जो रवीश कुमार के मोदी को लिखे पत्र के सन्दर्भ में लिखा गया है, मूल मुद्दे (trolling) पर कुछ कहता ही नहीं है…(शायद इस्सलिये क्यूंकि उसके सबूत रवीश कुमार पेश कर चुके हैं वहां चटकारा लेने के लिए कुछ नहीं है ) उसके बजाय, TRP बटोरने के लिए, तर्कविहीन, तथ्यहीन, सतही खुले पत्र को व्यक्तिगत आक्षेप के मसाले में लपेट कर परोसा जाता है. पत्र पढ़कर यह तो पता लगा ही की सुशांत सिन्हा नाम का कोई पत्रकार भी है, साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ की…
    – रवीश कुमार का उनके पिता के लिए पत्र ना सिर्फ अपने पिता के प्रति उनकी संवेदना अभिव्यक्त करता है साथ ही उन् दोनों के रिश्ते की मज़बूती भी दर्शाता है. हाँ इस देश काल में जहाँ तो हमारे `लोकप्रिय’ नेतागण, माँ के साथ तो फोटो खिचाते हैं औऱ अपने पिता के बारे में एक शब्द भी प्रस्फुटित करते हूँ, ऐसे पत्र आप जैसो को अजूबे ही लगेंगे. खैर…रवीश कुमार स्वर्गवासिय पिता को पत्र लिख सकते हैं क्यूंकि उनके पास लिखने के लिए ज़रूरी सोच है, भाव-भाषा पर पकड़ है, कौशल है…सुशांत सिन्हा आप को एक अदना पाठक की ओर से एक सुझाव की आप कोशिश भी ना कीजियेगा कभी. आप तो यह परचा, पत्र टाइप काम कीजिये जिससे लोगो को आप बताते रहे की “I also exist ” !
    – अगर रवीश कुमार को मिलती है बड़ी सैलरी तो वह पूर्णतया deserve करते हैं, कुबूत है उनमें…आज जहाँ २ कौड़ी को बचाने ओर पाने के लिए लोग घुटने पर आ गए हैं वहां “करोड़ों” की सालाना आमदनी को रवीश कुमार रोज़ दांव पर लगाते हैं यह सोच कर उनके के लिए इज़्ज़त ओर बढ़ गयी.
    – वह अमिताभ बच्चन वाले एपिसोड पर क्या हुआ थोड़ा `जंगल में मोर नाचा’ वाला मसला है…लेकिन अगर, अगर रवीश जी ने कहा भी तो गलत नहीं कहा. आज की तरीक में मैं ओर मुझ जैसे कई हैं को असल में मिस्टर बच्चन को कम ओर रवीश जी को ज़्यादा देखना/सुनना चाहेंगे. बच्चन साहब का क्या वह तो को कही भी दिख जायेंगे क्रीम,पाउडर बेचते हुए.
    – रवीश जी के लिए सुशांत सिन्हा का सुझाव की रवीश जी एक अच्छे स्क्रिप्ट लेखक या कलाकार बन सकते हैं सराहनीह है. रवीश कुमार तो हैं ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी लेकिन सुशांत जी का क्या होगा. पत्र में `शहीद’ वाले मसले ओर मोदी वाली फेसबुक टिप्पड़ी के साथ ही सुशांत सिन्हा ने अपनी राजनैतिक / वैचारिक पकड़ का सबूत तो दे ही दिया है..जो उनको इस बरसाती मौसम में तो टर्राने का मौका तो ज़रूर देती है लेकिन ज़्यादा दूर नहीं ले जाएगी. एक सुझाव है सुशांत सिन्हा के लिए की अपने पूर्व-सहयोगी को मदद करने के बजाये (“और कुछ नहीं तो मेरे जैसे कई पूर्व सहकर्मी हैं हीं आपकी मदद के लिए”) अपने भविष्य कि चिंता करें – ऐसे स्तरहीन पत्रकारिता के चलते उनको ज़रूर ही भविष्य की चिंता करनी चाहिए. जिस तरह से प्रोफेशनलिज्म ओर नैतिकता को ताक पर रखकर सुशांत सिन्हा जहाँ काम किया उस संसथान, वहां की निजी बातो को सार्वजनिक रूप से लिख है (रहें है या आज की पत्रकारिता की भाषा में कहें तो उछाल रहे है) उनको याद रखना चाहिए कि उनके वर्तमान के `माई-बाप’ भी उनकी इस फितरत से वाकिफ है औऱ समय आने पर इसी बड़बोलापन के चलते उनको रास्ता नपवा देंगे. ऐसा न हो यही उम्मीद है नहीं तो पब्लिक तो यही कहेगी की चले थे आँखों में मोतियाबिंद ले चले थे दुनिया की बिमारी ढूढ़ने, खुद ही नबीना होकर लौटे…आखिरकार पब्लिक है वह सब जानती है !

  101. अरे भई कौन सुशांत, कौन सिन्हा। रविश जी ने तन मन धन अर्पण कर खून से सींचा है पत्रकारिता को, समझौता नही किया। उनके सामने जीवाणु विषाणु भी नही हो आप।
    पत्र जिसके लिए लिखा जाता है उसको ही प्रेषित किया जाता है, तत्पश्चात जवाब मिलने पर चाहो तो किसी के समक्ष दोनों पत्रों को चर्चा के लिए रख सकते हो, लेकिन तुमने तो रविश जी को भेजा ही नही बस आम लोगों मे एकतरफा वाह वाही लूटने के लिए यहाँ रख दिया, पहले रविश जी जवाब तो ले लो, फिर रखना उनका जवाबी पत्र, धुँए मे जैसे आंखें मलते हो वैसा ही अहसास होगा।

  102. कँहा रविश और कँहा तुम।बकवास बन्द।मूर्ख अपने सीनियर से कुछ सिख लो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *